India UAE Strategic Partnership: नई दिल्ली में सोमवार को हुआ दृश्य कूटनीति से कहीं आगे था। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच तीन घंटे से कुछ अधिक समय चली बातचीत ने भारत-यूएई संबंधों को रणनीतिक (India UAE Strategic Partnership) से भविष्यवादी साझेदारी की दिशा में मोड़ दिया। कम समय, लेकिन फैसले बड़े रक्षा, ऊर्जा, निवेश, अंतरिक्ष, खाद्य सुरक्षा और संस्कृति तक फैला एजेंडा।
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व्यक्तिगत भरोसे से रणनीतिक मजबूती तक
प्रधानमंत्री मोदी का स्वयं हवाई अड्डे पर जाकर यूएई राष्ट्रपति का स्वागत करना और उन्हें एक ही वाहन में प्रधानमंत्री आवास तक ले जाना, दोनों नेताओं के निजी विश्वास और आपसी सम्मान का संकेत था। यही भरोसा औपचारिक बैठकों (India UAE Strategic Partnership) में ठोस नतीजों के रूप में सामने आया। पश्चिम एशिया की संवेदनशील स्थितियों ईरान, गाजा और यमन-पर भी खुलकर चर्चा हुई, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी रक्षा साझेदारियां क्षेत्रीय संघर्षों में खिंचने का संकेत नहीं हैं।
India UAE Strategic Partnership: रक्षा सहयोग – साझेदारी, न कि टकराव
भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा समझौते की दिशा में बातचीत को अहम माना जा रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार, यह सहयोग प्रशिक्षण, सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी तक सीमित है। भारत का रुख स्पष्ट है संतुलित कूटनीति और संप्रभु निर्णय।

व्यापार और निवेश – 2032 तक 200 अरब डॉलर का लक्ष्य
वर्ष 2022 के व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद द्विपक्षीय व्यापार में तेजी आई है। अब लक्ष्य है कि 2032 तक इसे दोगुना कर 200 अरब डॉलर से अधिक पहुंचाया जाए।
गुजरात के धोलेरा औद्योगिक शहर में यूएई निवेश को लेकर तस्वीर साफ हुई है। यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, विमान रखरखाव (MRO) सुविधाएं, शहरी अवसंरचना और पायलट प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे।
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ऊर्जा और परमाणु सहयोग – दीर्घकालिक सुरक्षा
ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए एचपीसीएल और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच समझौते के तहत 2028 से अगले दस वर्षों तक भारत को सालाना पांच लाख मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति होगी।
इसके साथ ही, हाल में भारत में पारित परमाणु कानून से बने अवसरों के मद्देनज़र छोटे और बड़े परमाणु संयंत्रों पर सहयोग की सहमति बनी ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में निर्णायक पहल।
अंतरिक्ष, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल कूटनीति
अंतरिक्ष क्षेत्र में रॉकेट निर्माण, लॉन्चिंग साइट, प्रशिक्षण केंद्रों से जुड़ा समझौता भारत-यूएई सहयोग को नई ऊंचाई देगा।
खाद्य क्षेत्र में भारत से यूएई को चावल, कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा लाभ भारतीय किसानों को होगा।
इसके अलावा, ‘डिजिटल दूतावास’ की अवधारणा पर भी सहमति बनी यह कूटनीति (India UAE Strategic Partnership) का नया और आधुनिक प्रयोग माना जा रहा है।
संस्कृति और सॉफ्ट पावर – रिश्तों की आत्मा
अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ नामक सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना पर सैद्धांतिक सहमति बनी। यह भारतीय कला, विरासत और पुरातत्व का प्रतीक बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई राष्ट्रपति को गुजरात का हाथ से नक्काशी किया गया रॉयल वुडन झूला भेंट किया जो परिवार, संवाद और पीढ़ियों के बंधन का प्रतीक है और यूएई के घोषित ‘फैमिली ईयर 2026’ से भी जुड़ता है।
शेख फातिमा बिंत मुबारक को कश्मीरी पश्मीना शाल और केसर भेंट कर भारत की हस्तशिल्प परंपरा को सम्मान दिया गया।
सौदों से आगे, साझा भविष्य की ओर
यह मुलाकात केवल समझौतों (India UAE Strategic Partnership) की सूची नहीं, बल्कि विश्वास, निवेश और नवाचार पर आधारित साझेदारी का संकेत है। भारत और यूएई अब पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर साझा भविष्य गढ़ने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं।
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