Ankita Bhandari Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित Ankita Bhandari Case को लेकर जनता का गुस्सा एक बार फिर सड़कों से निकलकर सत्ता के गलियारों तक पहुंच गया है। इस बार विरोध का तरीका ऐसा है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड की दो सगी बहनों ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने खून से पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने व्यवस्था से सीधा और तीखा सवाल किया है-“क्या वीआईपी लोगों को अपराध करने की छूट है?”
खून से लिखा सवाल, जिसने सिस्टम को आईना दिखाया
सल्ट क्षेत्र की रहने वाली कुसुम लता बौड़ाई और उनकी छोटी बहन संजना, जो कक्षा 10 की छात्रा हैं, ने यह पत्र लिखकर अपना आक्रोश जाहिर किया। पत्र में उन्होंने लिखा कि जब एक बेटी को खुलेआम अन्याय का सामना करना पड़ता है और उसे समय पर न्याय नहीं मिलता, तो देश की बाकी बेटियां खुद को सुरक्षित कैसे मानें? यह पत्र केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
FPI की भारी बिकवाली से 2026 की शुरुआत, विदेशी निवेशकों ने दो दिन में निकाले ₹7,600 करोड़
यह निवेदन नहीं, सत्ता को तमाचा है
कुसुम लता बौड़ाई, जो किसान मंच की प्रदेश प्रवक्ता और पहाड़ों फाउंडेशन की अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि यह पत्र किसी व्यक्तिगत पीड़ा की अभिव्यक्ति नहीं है। उनके अनुसार, यह उस संवेदनहीन व्यवस्था के खिलाफ विरोध है, जो प्रभावशाली लोगों के आगे कमजोर दिखाई देती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह निवेदन नहीं, बल्कि सत्ता के चेहरे पर तमाचा है, ताकि वह जागे और Ankita Bhandari को न्याय मिले।’
सबूत मिटाने और वीआईपी संरक्षण के आरोप
खून से लिखे पत्र में बहनों ने आरोप लगाया है कि अंकिता भंडारी केस में लगातार सबूतों को कमजोर करने और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘जांच चल रही है’ जैसे बयान अब जनता को गुमराह करने का जरिया बन चुके हैं। उत्तराखंड की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहती है।
READ MORE: अमेरिका–वेनेजुएला तनाव का असर भारतीय बाजार पर, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रचा इतिहास!
एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति तक पहुंची आवाज
यह पत्र उप जिलाधिकारी (SDM) काशीपुर के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया है। प्रशासनिक चैनल से भेजा गया यह पत्र इस बात का संकेत है कि जनता अब संवैधानिक पदों से सीधे हस्तक्षेप की उम्मीद कर रही है। यह कदम बताता है कि Ankita Bhandari Case आंदोलन अब केवल स्थानीय स्तर का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है।
महिला संगठनों में उबाल, व्यवस्था पर सवाल
महिला अधिकार समूहों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया है। उनका कहना है कि जब एक स्कूली छात्रा को अपने खून से पत्र लिखना पड़े, तो यह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। संगठनों के मुताबिक, Ankita Bhandari Case अब केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
उत्तराखंड की बड़ी खबर देखने के लिये क्लिक करे
प्रदेशभर में जारी हैं विरोध प्रदर्शन
उत्तराखंड के कई जिलों में Ankita Bhandari को न्याय दिलाने की मांग को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्र संगठन, महिला समूह और आम नागरिक सड़कों पर उतरकर कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
सियासत में भी गर्माया मामला
Ankita Bhandari Case ने उत्तराखंड की राजनीति को भी गरमा दिया है। हाल ही में बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के ऑडियो सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष खुद को जांच प्रक्रिया के दायरे में सही ठहराने की कोशिश कर रहा है।
Latest News Update Uttar Pradesh News,उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
खून से लिखी आवाज, जो अनसुनी नहीं हो सकती
सल्ट की इन दो बहनों का कदम यह दिखाता है कि Ankita Bhandari Case ने समाज को किस हद तक झकझोर दिया है। यह केवल भावनात्मक विरोध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ चेतावनी है, जो न्याय को ताकत और रसूख से तौलती है। अब सवाल यह है कि क्या यह खून से लिखा पत्र सत्ता को सचमुच जगाएगा, या यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। देश की निगाहें अब जवाब पर टिकी हैं।



