Kolkata Rape Case : प्रभावी नेता का असली चेहरा आया सामने
कोलकाता लॉ कॉलेज में हालिया रेप केस ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया है। आरोपी मोनोजीत मिश्रा, जिसे लोग “मैंगो मिश्रा” या “मोनोजीत दादा” भी कहते थे, कभी इस कॉलेज का छात्र नेता था और कैंपस पर उसका गहरा प्रभाव था। इसी प्रभाव और खौफ के चलते कॉलेज की दीवारों पर “मोनोजीत दादा हमारे दिलों में हैं” जैसे नारे तक लिखे मिलते थे। लेकिन वही शख्स अब कॉलेज की एक छात्रा से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार है। घटना ने न सिर्फ कॉलेज प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि बंगाल की छात्र राजनीति और समाज में फैली सत्ता के दुरुपयोग की प्रवृत्ति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Kolkata Rape Case : जानें क्या हैं पूरी खबर ?
मोनोजीत मिश्रा का अतीत बताता है कि वह कभी कानून के क्षेत्र में करियर बनाना चाहता था। 2007 में कोलकाता लॉ कॉलेज में दाखिला लिया और 2012 तक कोर्स पूरा करना था, लेकिन बीच में छात्र राजनीति में पड़कर पढ़ाई छोड़ दी। 2011 में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आने के बाद कॉलेज की राजनीति में उसका रसूख और बढ़ गया। 2017 में दोबारा दाखिला लेकर 2022 में डिग्री ली, लेकिन इस दौरान उस पर कॉलेज के प्रिंसिपल ऑफिस में तोड़फोड़ समेत कई उत्पीड़न के आरोप लगे। तृणमूल ने कॉलेज यूनिट भंग तो कर दी, मगर छात्रसंघ चुनाव न होने के कारण वह कॉलेज कैंपस में असली ताकत बना रहा। छात्र बताते हैं कि उसका गिरोह लड़कियों की तस्वीरें चोरी से लेकर मॉर्फ करता, उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में डालकर बॉडी शेम करता और उनके खिलाफ अफवाहें फैलाता। कई छात्राओं ने डर की वजह से कॉलेज आना बंद कर दिया। मोनोजीत के पिता रॉबिन मिश्रा कालीघाट में पुजारी हैं और कहते हैं कि अपने बेटे के हिंसक और राजनीति में डूबने की वजह से उन्होंने उससे रिश्ता तोड़ लिया था। मोनोजीत चार साल से घर से अलग रहता था, पड़ोसियों के अनुसार वह शराब पीकर झगड़ा करता था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2023 में पासआउट होने के बाद भी मोनोजीत कॉलेज में बतौर क्लेरिकल स्टाफ काम करने लगा, जिसके लिए उसे 500 रुपये प्रतिदिन मिलते थे। एक वकील होकर यह काम करना सवाल खड़े करता है—क्या यह कॉलेज प्रशासन द्वारा जानबूझकर दी गई भूमिका थी ताकि वह कैंपस में अपना असर बनाए रखे? और इसी कैंपस के यूनियन रूम में 25 जून 2025 की शाम करीब 7 बजे वह जघन्य अपराध हुआ। पुलिस के अनुसार, मोनोजीत ने अपने दो साथियों प्रमित मुखर्जी और जैब अहमद के साथ मिलकर 24 वर्षीय छात्रा को तृणमूल छात्र इकाई के प्रति “वफादारी साबित” करने के नाम पर बुलाया। जब छात्रा को शक हुआ और वह निकलना चाहती थी, तो उसे जबरन एक कमरे में खींचा गया, उसके साथ बलात्कार किया गया और इस दौरान वीडियो बनाकर धमकाया गया। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज से पुष्टि हुई कि पीड़िता को जबरन कमरे में ले जाया गया। अब तक मोनोजीत समेत चार लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिसमें एक गार्ड भी शामिल है। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे छात्र राजनीति के नाम पर कॉलेजों में गुंडागर्दी पनपती रही, और कैसे प्रशासनिक चुप्पी और राजनीतिक संरक्षण ने एक अपराधी को नेता बना दिया, जिसने आखिरकार एक निर्दोष छात्रा की जिंदगी तबाह कर दी।
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