Morarji Desai: भारतीय राजनीति के इतिहास में कई दिग्गज नेता हुए, लेकिन मोरारजी देसाई जैसा व्यक्तित्व बिरला ही रहा। गुजरात की मिट्टी से निकले मोरारजी भाई न केवल भारत के चौथे प्रधानमंत्री थे, बल्कि अपनी सख्त जीवनशैली, अटूट ईमानदारी और कुछ बेहद विवादास्पद आदतों के लिए भी जाने जाते थे। उनका जन्म 29 फरवरी 1896 को हुआ था, जिसका मतलब है कि वह अपना जन्मदिन चार साल में केवल एक बार ही मना पाते थे. लीप ईयर के इस खास संयोग के साथ-साथ उनके जीवन से जुड़ी सबसे चर्चित बात थी ‘स्वमूत्रपान’ (Urine Therapy) पर उनका अटूट विश्वास, जिसे वह अपनी लंबी उम्र और तंदुरुस्ती का असली राज मानते थे.
Morarji Desai 81 वर्ष की आयु में देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने थे. अनुशासन के पक्के और इरादों के धनी मोरारजी भाई का जीवन 99 साल तक चला, जो आज भी शोध और चर्चा का विषय है. उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि वे ‘शिवाम्बु’ यानी स्वमूत्र का सेवन करते हैं और इसे लाखों गरीब भारतीयों के लिए एक प्रभावी और मुफ्त औषधि मानते थे. आइए जानते हैं भारत रत्न और पाकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ (तहरीक-ए-पाकिस्तान) से नवाजे गए इस इकलौते भारतीय नेता के जीवन के वो पहलू, जो उन्हें सबसे अलग बनाते हैं.
रोज क्यों पीते थे अपना ही मूत्र?
Morarji Desai स्वमूत्रपान थेरेपी के न केवल समर्थक थे, बल्कि इसके सबसे बड़े प्रचारक भी थे. उनका मानना था कि मूत्र में शरीर के लिए आवश्यक कई औषधीय तत्व होते हैं. हालांकि विज्ञान ने कभी इसके प्रमाण नहीं दिए, लेकिन मोरारजी इसे अपनी 99 साल लंबी जिंदगी का आधार मानते थे. वे कहते थे कि लाखों भारतीयों के लिए यह एकदम सही दवा का मिश्रण है, खासकर ऐसे लोगों के लिए जो अपने इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
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कैसा रहा राजनीतिक सफर?
Morarji Desai और इंदिरा गांधी के बीच के मतभेद जगजाहिर थे। नेहरू और शास्त्री के बाद प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होने के बावजूद उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा. 1967 में वे इंदिरा सरकार में उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने, लेकिन तालमेल कभी नहीं बैठा. 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर उन्होंने इंदिरा गांधी को जेल तक भेजा. उनके कार्यकाल के दौरान भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (RAW) के बजट में कटौती और उसे लगभग निष्क्रिय करने के फैसलों पर आज भी सवाल उठते हैं.
सादगी, अनुशासन और हठी स्वभाव
ब्रिटिश काल में डिप्टी कलेक्टर की नौकरी छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम में कूदने वाले Morarji Desai अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करते थे. उनके बारे में अक्सर कहा जाता था कि वे बहुत हठी थे. उनके अनुशासन का आलम यह था कि प्रधानमंत्री रहते हुए भी वे समय पर सो जाते थे और उन्हें रात में जगाना किसी को पसंद नहीं था. वे भोजन में केवल थोड़ा दूध, मौसमी फलों का रस और कुछ सूखे मेवे लेते थे.
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पिता की आत्महत्या और तीसरे दिन शादी
Morarji Desai का निजी जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके पिता रणछोड़जी देसाई, जो एक शिक्षक थे, उन्होंने अवसाद के कारण कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली थी. इस दुखद घटना के मात्र तीसरे दिन मोरारजी की शादी हुई थी, जिसे उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारी मानकर स्वीकार किया.
भ्रष्टाचार के आरोप और सम्मान
Morarji Desai स्वयं बेदाग और ईमानदार छवि के थे, लेकिन उनके बेटे कांति देसाई पर प्रधानमंत्री कार्यालय का लाभ उठाकर डीलिंग करने के आरोप लगे. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे पर उन्हें खुलकर घेरा था. बावजूद इसके, उनकी उपलब्धियां इतनी बड़ी थीं कि वे दुनिया के एकमात्र ऐसे व्यक्ति बने जिन्हें भारत का ‘भारत रत्न’ और पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ.



