Nanda Devi Raj Jat: एशिया की सबसे लंबी और कठिन पैदल यात्राओं में शामिल विश्व प्रसिद्ध Nanda Devi Raj Jat यात्रा को लेकर एक बार फिर भ्रम की स्थिति बन गई है। एक ओर नंदानगर स्थित सिद्धपीठ नंदाधाम कुरूड़ में वसंत पंचमी के अवसर पर ‘बड़ी नंदा जात’ को लेकर 2026 में यात्रा निकालने की घोषणा कर दी गई है, वहीं दूसरी ओर श्री नंदा देवी राजजात समिति, नौटी ने नंदा राजजात यात्रा को वर्ष 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया है। दो अलग-अलग घोषणाओं के बाद श्रद्धालुओं से लेकर प्रशासन तक असमंजस में है।
कुरूड़ में 2026 की बड़ी Nanda Devi Raj Jat का ऐलान
वसंत पंचमी के दिन नंदानगर क्षेत्र के सिद्धपीठ नंदाधाम कुरूड़ में गौड़ पुजारियों और मंदिर समिति की मौजूदगी में दिन-पट्टा निकाला गया। परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मां नंदा देवी के पश्वाओं ने ‘बड़ी नंदा जात 2026’ के आयोजन की घोषणा की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विधिवत धार्मिक अनुष्ठान हुए और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। स्थानीय आयोजन समिति ने इसे वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ा निर्णय बताया।
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5 सितंबर 2026 से शुरू होने का दावा
आयोजन समिति के अनुसार, वर्ष 2026 की बड़ी Nanda Devi Raj Jat में कुल 26 पड़ाव तय किए गए हैं। तय कार्यक्रम के तहत 5 सितंबर 2026 को मां नंदा देवी की डोली नंदाधाम कुरूड़ से रवाना होकर पहले पड़ाव चरबंग गांव पहुंचेगी। इसके बाद यह यात्रा विभिन्न पारंपरिक गांवों और पड़ावों से गुजरते हुए 16 सितंबर को मां नंदा देवी के धर्म भाई के गांव वाण पहुंचेगी।
आगे तय कार्यक्रम के अनुसार, 20 सितंबर 2026 को यात्रा अंतिम चरण में शिला समुद्र से आगे बढ़ते हुए होमकुंड पहुंचेगी। यहां विधि-विधान के साथ मां नंदा देवी को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु परंपरा के अनुसार जामुन डाली लौटेंगे। आयोजकों का दावा है कि यह पूरी यात्रा 2026 में ही संपन्न होगी।
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नौटी समिति का 2027 पर अडिग रुख
दूसरी ओर, श्री Nanda Devi Raj Jat समिति, नौटी ने इस घोषणा से अलग रुख अपनाया है। नौटी स्थित नंदा देवी मंदिर में समिति की ओर से स्पष्ट किया गया कि नंदा देवी राजजात यात्रा वर्ष 2027 में ही आयोजित की जाएगी। राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर ने मंदिर परिसर में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि बसंत पंचमी 2027 को दिन-पट्टा जारी किया जाएगा।
इस मौके पर नंदा देवी राजजात के सफल आयोजन की कामना को लेकर नौटी में विधिवत मनौती मांगी गई और छंतोली को शैलेश्वर शिवालय में स्थापित किया गया। समिति पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर अगले साल प्रस्तावित यात्रा के लिए तैयारियों का संकल्प लिया।
परंपरा और ज्योतिष का हवाला
श्री Nanda Devi Raj Jat समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 में राजजात केवल प्रस्तावित थी, लेकिन औपचारिक घोषणा मनौती के दौरान ही होती है। उन्होंने कहा कि ज्योतिषीय गणना और धार्मिक परंपरा के अनुसार 2027 में ही नंदा राजजात का आयोजन उचित है। समिति का तर्क है कि मलमास के कारण 2026 में राजजात का संचालन संभव नहीं है, इसलिए 2027 में यात्रा कराई जाएगी।
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प्रशासन भी उलझन में
Nanda Devi Raj Jat यात्रा को लेकर दो अलग-अलग तिथियां सामने आने के बाद जिला प्रशासन भी असमंजस की स्थिति में है। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर एक तिथि पर सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए कुरूड़ और नौटी से जुड़े समिति सदस्यों को आमंत्रित किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल किसी एक तारीख पर सहमति नहीं बन पाई है।
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महापंचायत के फैसले से भी बढ़ा भ्रम
गौरतलब है कि हाल ही में नंदानगर में नंदा देवी राजजात को लेकर महापंचायत आयोजित की गई थी। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि यात्रा 2026 में हर हाल में आयोजित की जाएगी और इसे ‘नंदा राजजात’ के बजाय ‘नंदा की बड़ी जात’ या ‘बड़ी नंदा जात (ठुलि जात)’ के नाम से जाना जाएगा। हालांकि, नौटी समिति इस फैसले से इत्तेफाक नहीं रखती और 2027 पर कायम है।
श्रद्धालुओं में असमंजस, समाधान की जरूरत
Nanda Devi Raj Jat यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और आस्था का प्रतीक है। ऐसे में तिथियों को लेकर पैदा हुआ भ्रम श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। अब सबकी नजर प्रशासन और दोनों समितियों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है, जिससे इस ऐतिहासिक यात्रा की तारीख को लेकर अंतिम और सर्वमान्य फैसला सामने आ सके।
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