Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत देहरादून पहुंच चुके हैं। उनके इस प्रवास को संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी में आयोजित विभिन्न बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के जरिए वे समाज के अलग-अलग वर्गों से विचार-विमर्श करेंगे।
शताब्दी वर्ष के अवसर पर विशेष कार्यक्रम
RSS की स्थापना वर्ष 1925 में हुई थी और इस वर्ष संगठन अपने 100 वर्ष पूरे कर रहा है। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में कई कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में Mohan Bhagwat का यह देहरादून दौरा तय किया गया है। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, यह प्रवास उत्सव से अधिक चिंतन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है।
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RSS से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि संगठन परंपरागत अर्थों में जश्न नहीं मनाता, बल्कि विचारों और सामाजिक समन्वय को आगे बढ़ाने पर बल देता है। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ आगामी 100 वर्षों के लक्ष्य, सामाजिक सहभागिता और संगठन विस्तार जैसे विषयों पर मंथन कर रहा है।
प्रमुख नागरिकों के साथ जन संवाद
22 फरवरी को देहरादून में एक जन गोष्ठी आयोजित की गई है, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख नागरिकों को आमंत्रित किया गया है। शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक सेवा और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि इस संवाद में शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के प्रभावशाली वर्गों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना और विचारों का आदान-प्रदान करना है।
कार्यक्रम के लिए चयनित अतिथियों की सूची पहले ही तैयार कर ली गई थी। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है। स्थानीय स्तर पर RSS के स्वयंसेवकों ने आयोजन की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
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पूर्व सैनिकों के साथ विशेष बैठक
23 फरवरी को सरसंघचालक पूर्व सैनिकों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह बैठक गढ़ी कैंट स्थित कल्चरल हॉल में आयोजित की जाएगी। उत्तराखंड को सैनिक बाहुल्य प्रदेश माना जाता है, ऐसे में पूर्व सैनिकों के साथ यह संवाद खास महत्व रखता है।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राष्ट्र सेवा, सामाजिक दायित्व और युवाओं को प्रेरित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। RSS लंबे समय से विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, और यह कार्यक्रम उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
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प्रदेश में संघ का विस्तार
RSS पदाधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड में संगठन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। दावा किया गया है कि प्रदेश के लगभग 13 लाख परिवारों तक संघ की पहुंच बनी है। करीब 11 हजार गांवों में संपर्क अभियान चलाए गए हैं और 2600 से अधिक टोलियों ने घर-घर जाकर संवाद स्थापित किया है।
राज्य के 712 मंडलों और 639 बस्तियों में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए हैं, जिनकी कुल संख्या 1300 इकाइयों तक पहुंच चुकी है। इन सम्मेलनों के माध्यम से सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती पर जोर दिया जा रहा है।
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बुद्धिजीवी वर्ग से भी होगी बातचीत
देहरादून प्रवास के दौरान खंड और नगर स्तर पर भी अलग-अलग वर्गों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। विद्यार्थियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों और शिक्षाविदों के लिए अलग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन बैठकों में वर्तमान सामाजिक चुनौतियों, शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय दृष्टिकोण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
RSS के प्रांत कार्यवाह ने बताया कि शताब्दी वर्ष केवल अतीत की उपलब्धियों का स्मरण भर नहीं है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी है। संगठन आने वाले वर्षों में समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंच बनाने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में काम करने की योजना पर विचार कर रहा है।
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा
हालांकि RSS कार्यक्रम को सामाजिक और वैचारिक संवाद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर चर्चा है। उत्तराखंड की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए भागवत का दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है।
दो दिवसीय प्रवास के दौरान Mohan Bhagwat का फोकस संवाद और विचार-मंथन पर रहेगा। शताब्दी वर्ष के इस चरण में RSS समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संपर्क बढ़ाने और अपने आगामी लक्ष्यों की रूपरेखा स्पष्ट करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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