Gold Price: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच दुनिया भर के बाजारों में हलचल मची हुई है। आम तौर पर जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या बड़ा भू-राजनीतिक संकट होता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर रुख करते हैं। ऐसे समय में Gold Price में तेज उछाल देखने को मिलता है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद Gold Price अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची ब्याज दरें फिलहाल सोने की तेजी पर ब्रेक लगा रही हैं।
युद्ध के कारण तेल बाजार में उथल-पुथल
दरअसल, पश्चिम एशिया में हालिया टकराव ने वैश्विक बाजारों को झकझोर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। इस संघर्ष का असर आसपास के देशों जैसे Saudi Arabia, Iraq और United Arab Emirates तक महसूस किया जा रहा है।
इस स्थिति का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ते हुए लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऊर्जा बाजार में इस उछाल के पीछे एक बड़ा कारण Strait of Hormuz है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है। इस रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। यदि इस मार्ग में रुकावट आती है तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
संकट के बावजूद Gold Price में ठहराव
इतिहास गवाह है कि युद्ध, मंदी या वैश्विक अनिश्चितता के समय सोना निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इसलिए सामान्य तौर पर ऐसे संकटों के दौरान Gold Price तेजी से बढ़ता है।
लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह पैटर्न पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में Gold Price सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी मुख्य वजह मजबूत अमेरिकी डॉलर है।
जब वैश्विक संकट बढ़ता है, तो निवेशक अक्सर अमेरिकी मुद्रा को भी सुरक्षित निवेश मानते हैं। इस समय डॉलर की मांग बढ़ने से उसकी मजबूती में इजाफा हुआ है। यही कारण है कि Gold Price को वह तेजी नहीं मिल पा रही, जिसकी आम तौर पर उम्मीद की जाती है।
ऊंची ब्याज दरें भी बन रही बड़ी वजह
सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा कारक है ब्याज दरें। जब केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखते हैं, तो निवेशक सोने की बजाय ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों को ज्यादा महत्व देते हैं।
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अमेरिका में Federal Reserve की नीतियों का भी Gold Price पर सीधा असर पड़ता है। यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखता है, तो सोने में निवेश की आकर्षण क्षमता कुछ कम हो जाती है। यही वजह है कि वर्तमान संकट के बावजूद सोने की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने की स्थिति
अगर हाल के आंकड़ों पर नजर डालें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में फरवरी के अंत में Gold Price करीब 5,277 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया था। इसके बाद इसमें कुछ गिरावट आई और यह लगभग 5,054 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। फिलहाल सोना करीब 5,165 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।
वहीं भारत के घरेलू बाजार में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सोना फरवरी के अंत में करीब 1,69,880 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। बाद में यह घटकर लगभग 1,58,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया।
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आगे कैसा रह सकता है Gold Price का रुख?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में Gold Price कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगा। यदि पश्चिम एशिया में युद्ध और ज्यादा बढ़ता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ती है, तो सोने की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक तेजी आ सकती है।
दूसरी संभावना यह है कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में थोड़ी कटौती करते हैं, तो Gold Price में मध्यम स्तर की तेजी देखने को मिल सकती है।
हालांकि यदि डॉलर मजबूत बना रहता है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने की कीमतों में गिरावट भी संभव है।
कुल मिलाकर मौजूदा वैश्विक हालात में Gold Price कई शक्तियों के बीच संतुलन बनाकर चल रहा है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता के साथ बाजार पर नजर बनाए रखने का है, क्योंकि आने वाले महीनों में भू-राजनीतिक घटनाएं सोने की दिशा तय कर सकती हैं।
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