Dehradun Bar Association Protest ने राजधानी की न्यायिक व्यवस्था में हलचल मचा दी है। देहरादून में जिलाधिकारी और अधिवक्ताओं के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। दून बार एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी के ट्रांसफर तक न्यायिक कार्यों के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
विवाद ने लिया गंभीर रूप
हालिया घटनाक्रम के बाद Dehradun Bar Association Protest ने नया मोड़ ले लिया है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस कारण बार एसोसिएशन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि जब तक जिलाधिकारी का स्थानांतरण नहीं होता, तब तक न्यायालय के कार्यों का बहिष्कार जारी रहेगा।
Read More: देहरादून में बढ़ते अपराध पर सख्त एक्शन, गृह विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश
बहिष्कार का बड़ा फैसला
Dehradun Bar Association Protest के तहत अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी न्यायालय के साथ-साथ राजस्व न्यायालयों और रजिस्ट्रार कार्यालयों का भी बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। यह कदम न्यायिक कार्यों को प्रभावित कर सकता है और आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बार एसोसिएशन का कहना है कि यह फैसला मजबूरी में लिया गया है, क्योंकि उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए
प्रेस वार्ता के दौरान Dehradun Bar Association Protest से जुड़े अधिवक्ताओं ने राजस्व न्यायालयों और तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दाखिल-खारिज और विरासत से जुड़े मामलों की फाइलें महीनों से लंबित पड़ी हैं।
इसके अलावा, एडीएम (एफ) जैसे न्यायालयों में सुनवाई के लिए समय निर्धारित नहीं होने से भी लोगों को परेशानी हो रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जिलाधिकारी इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
Read More: सीएम धामी ने केंद्र से मांगी बड़ी मदद, कुंभ-2027 और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
विवाद की जड़ क्या है?
दरअसल, Dehradun Bar Association Protest की शुरुआत 25 मार्च को हुई एक घटना से जुड़ी है। कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा ने न्यायालय की कार्यवाही पर कुछ टिप्पणियां की थीं।
जिलाधिकारी ने इन टिप्पणियों को न्यायालय की गरिमा के खिलाफ मानते हुए इसे पेशेवर आचरण का उल्लंघन बताया। इसके बाद प्रशासन ने इस मामले को अनुशासन समिति के पास भेज दिया और जांच के दौरान अधिवक्ता के प्रैक्टिस अधिकारों के निलंबन की भी सिफारिश की।
बार एसोसिएशन का पक्ष
Dehradun Bar Association Protest के तहत बार एसोसिएशन ने जिलाधिकारी की कार्रवाई को एकतरफा और अनुचित बताया है। अध्यक्ष अनिल कुकरेती ने कहा कि प्रेमचंद शर्मा सात बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।
Latest News Update Uttar Pradesh News,उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
उनका कहना है कि अगर कोई आपत्ति थी, तो पहले इसकी जानकारी बार एसोसिएशन को दी जानी चाहिए थी। सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
Dehradun Bar Association Protest के दौरान अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे अधिवक्ता समुदाय के सम्मान से जुड़ा मामला है।
आम लोगों पर असर
इस बहिष्कार का सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है। Dehradun Bar Association Protest के चलते न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई प्रभावित होगी, जिससे लोगों को न्याय पाने में देरी हो सकती है।
Dehradun Bar Association Protest ने देहरादून में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच टकराव को गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं और न्यायिक व्यवस्था को फिर से सामान्य स्थिति में लाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
पढ़े ताजा अपडेट: Hindi News, Today Hindi News, Breaking News



