CM Dhami Statement: उत्तराखंड में पिछले एक महीने से जारी राजनीतिक घमासान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर विपक्ष, सामाजिक संगठनों और आम जनता का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पूरे प्रदेश में सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच मंगलवार दोपहर CM Dhami खुद मीडिया के सामने आकर प्रेस वार्ता करने जा रहे हैं, जिसे सरकार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
अंकिता हत्याकांड बना सरकार के लिए सबसे बड़ा संकट
अंकिता भंडारी हत्याकांड इस समय उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष का आरोप है कि इस मामले में एक कथित वीआईपी को बचाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस समेत अन्य दल लगातार सभी जिलों में प्रदर्शन कर सरकार से सीधे सवाल पूछ रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा और राज्य सरकार इस पूरे मामले को लेकर असहज नजर आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पहला मौका है जब किसी एक मामले ने सरकार और संगठन- दोनों को एक साथ दबाव में ला दिया है।
कांग्रेस का दबाव तेज, रुद्रप्रयाग से सीबीआई जांच की मांग, भाजपा पर गंभीर आरोप
CM Dhami Statement: वायरल ऑडियो से बढ़ी सियासी हलचल
भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर से जुड़े वायरल ऑडियो और वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। इन ऑडियो क्लिप्स में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक कथित वीआईपी के नाम का जिक्र होने का दावा किया गया है। भले ही सरकार इन दावों को निराधार बता रही हो, लेकिन सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। इन वायरल ऑडियो के बाद प्रदेशभर में जनता का आक्रोश और तेज हो गया है, जिससे सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।
भाजपा नेताओं की सफाई, लेकिन सवाल बरकरार
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर अब तक भाजपा संगठन की ओर से कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस वार्ताएं की हैं। सबसे पहले भाजपा विधायक खजान दास ने मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखा। इसके बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने भी प्रेस को संबोधित कर सरकार और संगठन की स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।
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हालांकि इन सभी प्रेस वार्ताओं के दौरान पत्रकारों के तीखे सवालों ने नेताओं को असहज कर दिया। विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे आरोपों और कथित वीआईपी के सवाल पर कोई ठोस जवाब न मिल पाने से सरकार की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ती नजर आईं।
मानहानि याचिका और FIR से उलझा मामला
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि विपक्षी दल जानबूझकर उनकी छवि खराब कर रहे हैं। वहीं देहरादून के डालनवाला थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर भी दर्ज की गई है। कानूनी मोर्चे पर उठाए गए इन कदमों से मामला और जटिल हो गया है।
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बीजेपी के भीतर असंतोष, इस्तीफों से बढ़ी परेशानी
अंकिता भंडारी हत्याकांड का असर भाजपा संगठन के भीतर भी साफ दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों में पार्टी के तीन नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा देकर सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए सीबीआई जांच की मांग की। इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी ने भी पार्टी छोड़ दी। उन्होंने कहा कि अंकिता को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है और यह मामला उत्तराखंड की जनभावनाओं से जुड़ा है।
इसके अलावा ऋषिकेश से भाजपा युवा मोर्चा के जिला मंत्री अंकित बनखंडी ने भी प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपते हुए उर्मिला सनावर, सुरेश राठौर और यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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CM Dhami Statement पर टिकी निगाहें
इन तमाम राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच CM Dhami Statement की आज होने वाली प्रेस वार्ता को बेहद अहम माना जा रहा है। प्रदेशभर में जारी प्रदर्शनों और सीबीआई जांच की मांग के बीच यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर कोई बड़ा और निर्णायक ऐलान कर सकते हैं।
हालांकि सीबीआई जांच को लेकर अंतिम फैसला क्या होगा, यह तो CM Dhami Statement के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल इतना तय है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है CM Dhami Statement और आने वाले दिनों में यह मामला सरकार के लिए और भी बड़ी चुनौती बन सकता है।



