CDS Anil Chauhan: पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में एक विशेष अकादमिक कार्यक्रम के दौरान देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ CDS Anil Chauhan ने विद्यार्थियों से संवाद किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर केंद्रित था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शोधार्थी और संकाय सदस्य उपस्थित रहे। पूरे सत्र के दौरान परिसर में गंभीर और विचारोत्तेजक वातावरण बना रहा।
राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा पर विस्तृत चर्चा
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए CDS Anil Chauhan ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल सीमा पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी मानना अधूरा दृष्टिकोण है। उनके अनुसार, यह एक बहु-आयामी अवधारणा है, जिसमें राजनीतिक इच्छाशक्ति, आर्थिक मजबूती, तकनीकी प्रगति और सामाजिक एकजुटता सभी की समान भूमिका होती है।
उन्होंने छात्रों को समझाया कि जब राष्ट्र का हर नागरिक अपने दायित्व के प्रति सजग होता है, तभी सुरक्षा का ढांचा मजबूत बनता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में सुरक्षा की चुनौतियां केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि कई नए रूपों में सामने आ रही हैं।
READ MORE: अप्रैल 2026 में शुरू हो सकता है विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम, उत्तराखंड में तैयारियां तेज
भारतीय सामरिक परंपरा का उल्लेख
व्याख्यान के दौरान सीडीएस ने भारत की प्राचीन सामरिक विरासत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारतीय ग्रंथों में युद्धकला और रणनीति का विस्तृत वर्णन मिलता है। विशेष रूप से अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें राज्य संचालन, कूटनीति और शक्ति संतुलन पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा में केवल युद्ध जीतने पर ही नहीं, बल्कि दीर्घकालीन स्थिरता और संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। यही कारण है कि भारत की रणनीतिक सोच समय के साथ विकसित होती रही है।
मानसिक स्वतंत्रता और मौलिक सोच की आवश्यकता
CDS Anil Chauhan ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे विदेशी शासन के दौरान भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता प्रभावित हुई। हालांकि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश ने रक्षा और रणनीति के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है, लेकिन अभी भी मौलिक सोच को और प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल विदेशी मॉडलों की नकल करने के बजाय भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान विकसित करें। उनका मानना था कि यदि हथियार निर्माण, रक्षा तकनीक और रणनीति में आत्मनिर्भरता आएगी, तो देश की सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी।
सुरक्षा के तीन स्तरों की व्याख्या
अपने संबोधन में CDS Anil Chauhan ने राष्ट्रीय सुरक्षा को तीन स्तरों में समझाया।
- पहला स्तर दीर्घकालीन रणनीतिक दृष्टि से जुड़ा है, जिसमें कूटनीतिक संबंध, आर्थिक स्थिरता और तकनीकी विकास शामिल हैं।
- दूसरा स्तर रक्षा तंत्र का है, जहां सशस्त्र बलों की तैयारी और क्षमता महत्वपूर्ण होती है।
- तीसरा स्तर आंतरिक मजबूती का है, जिसमें आत्मनिर्भरता, संसाधनों का कुशल प्रबंधन और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल है।
उन्होंने कहा कि इन तीनों स्तरों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। यदि किसी एक स्तर में कमजोरी आती है, तो पूरी सुरक्षा संरचना प्रभावित हो सकती है।
उत्तराखंड की बड़ी खबर देखने के लिये क्लिक करे
बदलते युद्ध का स्वरूप और तकनीकी चुनौतियां
CDS Anil Chauhan ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज युद्ध केवल रणभूमि तक सीमित नहीं है। साइबर हमले, सूचना युद्ध, ड्रोन तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए आयाम सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्ष तेज, सीमित और तकनीक आधारित हो सकते हैं। ऐसे में भारत को अपनी रणनीति को समयानुकूल बनाना होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि क्षेत्रीय चुनौतियों और सीमा संबंधी मुद्दों के कारण देश को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।
छात्रों के साथ संवाद और प्रश्नोत्तर
कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा तकनीक और करियर संभावनाओं से जुड़े कई प्रश्न पूछे। CDS Anil Chauhan ने धैर्यपूर्वक सभी प्रश्नों का उत्तर दिया और युवाओं को अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया।
READ MORE: 9 मार्च से गैरसैंण में गूंजेगी लोकतंत्र की आवाज, 11 मार्च को पेश होगा वार्षिक बजट
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि विचार और नेतृत्व विकसित करने का मंच है। यदि युवा वर्ग जागरूक और जिम्मेदार बनेगा, तो देश की सुरक्षा और विकास दोनों सुनिश्चित होंगे।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। छात्रों के लिए यह अवसर न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के जटिल पहलुओं को समझने का था, बल्कि देश के सर्वोच्च सैन्य नेतृत्व से सीधे संवाद का भी।
पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking



