UP Government Action on SDM Suspension: उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन से जुड़े मामलों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर सख्त संदेश दिया है। चंदौली जिले से जुड़े एक पुराने मामले में कार्रवाई करते हुए सरकार ने तीन वरिष्ठ एसडीएम अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध कब्जेदारों को राहत दी और सरकारी नियमों की अनदेखी की। सरकार का कहना है कि इस तरह की लापरवाही अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
चंदौली में तहसीलदार रहते हुए लिए गए फैसले सवालों में
यह पूरा मामला चंदौली जिले के पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जब ये अधिकारी वहां तहसीलदार के पद पर तैनात थे, तब उन्होंने सरकारी और ग्राम समाज की जमीन से जुड़े कई मामलों में विवादित आदेश पारित किए। खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, परती और बंजर भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ पहले से ही बेदखली और वसूली के आदेश दिए गए थे, लेकिन बाद में इन आदेशों को बिना ठोस कारण रद्द कर दिया गया।
जिलाधिकारी की जांच से सामने आई अनियमितता
मामले की परतें तब खुलीं, जब चंदौली के जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग ने पुरानी निस्तारित फाइलों की समीक्षा करवाई। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जिन मामलों में कब्जा हटाने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था, उन्हें बाद में बदल दिया गया। यह प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई गई। डीएम ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए पूरे मामले की गहराई से जांच कराने का फैसला किया।
जांच समिति ने बताई नियमों की अनदेखी
जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। इसमें एडीएम न्यायिक, एसडीएम चकिया और एसडीएम चंदौली को शामिल किया गया। समिति ने दस्तावेजों, आदेशों और रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि तीनों अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसले लिए और इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आदेश चुनिंदा कब्जेदारों को लाभ पहुंचाने वाले थे।
तीन जिलों में तैनात SDM हुए निलंबित
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने शासन को कार्रवाई की संस्तुति भेजी। इसके बाद प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने निलंबन का आदेश जारी किया। निलंबित अधिकारियों में लालता प्रसाद (वर्तमान तैनाती गाजियाबाद), सतीश कुमार (एटा) और विराग पांडेय (बुलंदशहर) शामिल हैं। निलंबन अवधि में तीनों अधिकारियों को आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद के कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
नियमों से समझौता नहीं
इस कार्रवाई के जरिए योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि सरकारी जमीन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। चाहे अधिकारी कितना ही वरिष्ठ क्यों न हो, अगर नियमों का उल्लंघन होगा तो कार्रवाई तय है। फिलहाल तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आगे और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस फैसले से आम लोगों को यह भरोसा मिला है कि प्रशासन में जवाबदेही तय की जा रही है और सरकारी संपत्ति की रक्षा के लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है।



