Sambhal Violence Case: उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसक घटना से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम दखल दिया है। कोर्ट ने पूर्व सर्कल ऑफिसर अनुज कुमार चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निचली अदालत के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले से पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
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Sambhal violence case : किस घटना से जुड़ा है पूरा विवाद?
यह मामला नवंबर 2024 में संभल में भड़की हिंसा से जुड़ा है। आरोप है कि उस दौरान पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में एक युवक घायल हो गया था। पीड़ित के पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया कि उनका बेटा उस समय इलाके में सामान बेच रहा था और अचानक हुई गोलीबारी में वह चपेट में आ गया।
Sambhal violence case : शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
शिकायत के मुताबिक, घटना के समय पुलिस बल मौके पर मौजूद था और हालात काबू में करने के दौरान गोली चलाई गई। आरोप लगाया गया कि यह कार्रवाई गैरजरूरी थी और इसमें आम नागरिक घायल हुआ। इसी आधार पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की मांग की गई।
Sambhal violence case : निचली अदालत ने क्या कहा था?
संभल की अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पूर्व CO अनुज चौधरी और उस समय के थाना प्रभारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत का कहना था कि सरकारी पद पर होने का मतलब यह नहीं कि कोई कानून से ऊपर हो जाए। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला भी दिया गया था।
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Sambhal violence case : हाईकोर्ट क्यों पहुंचा मामला?
निचली अदालत के आदेश को अनुज चौधरी और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। दलील दी गई कि मजिस्ट्रेट ने कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी अधिकारियों को मिलने वाली सुरक्षा को नजरअंदाज किया है।
Sambhal violence case : राज्य सरकार ने क्या तर्क रखे?
सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि नए आपराधिक कानून BNSS की धारा 175 के तहत FIR का आदेश देने से पहले कुछ अनिवार्य शर्तें होती हैं, जिनका पालन नहीं किया गया। उनका कहना था कि मजिस्ट्रेट ने बिना पूरी प्रक्रिया अपनाए आदेश पारित कर दिया।
Sambhal violence case : सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा का मुद्दा
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सरकारी कर्मचारियों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए कार्यों के लिए बेवजह मुकदमों से बचाने की व्यवस्था देता है। जब तक यह साबित न हो जाए कि कार्रवाई निजी मंशा से की गई, तब तक FIR का आदेश देना उचित नहीं है।
Sambhal violence case : ‘फोरम शॉपिंग’ का आरोप
सरकार ने शिकायतकर्ता पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक ही मामले को अलग-अलग मंचों पर उठाया। साथ ही यह भी कहा गया कि हिंसा से जुड़े मामलों में पहले से जांच चल रही थी, जिसे नजरअंदाज किया गया।
Sambhal violence case : हाईकोर्ट का रुख क्या रहा?
दो दिन तक चली सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल FIR दर्ज नहीं की जाएगी और सभी पहलुओं पर अगली सुनवाई में विस्तार से विचार होगा।
Sambhal violence case : आगे क्या हो सकता है?
अब यह मामला 24 फरवरी की सुनवाई पर टिका है। उस दिन कोर्ट तय करेगा कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ेगी या नहीं। यह केस न सिर्फ संभल हिंसा से जुड़ा है, बल्कि यह भी तय करेगा कि ड्यूटी के दौरान पुलिस की कार्रवाई की कानूनी सीमा क्या है।
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