Noida Labour Protest: दिल्ली से सटे औद्योगिक हब नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ मजदूरों का प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है। सोमवार, 13 अप्रैल को फेस-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स के बाहर स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इस अशांति का सीधा असर नोएडा के दो सबसे बड़े स्तंभों गारमेंट (होजरी) और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा है। उत्पादन रुकने और सप्लाई चेन बाधित होने से करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
नोएडा का फेस-2 इलाका केवल कपड़ों का केंद्र नहीं है, बल्कि यह सैमसंग, ओप्पो और डिक्सन जैसी दिग्गज टेक कंपनियों का भी घर है। मजदूरों के इस उग्र प्रदर्शन ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि नोएडा में लेबर की सुलभ उपलब्धता ही यहां निवेश का सबसे बड़ा कारण रही है, लेकिन हालिया तनाव ने निवेशकों और मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी चलाने वाले एग्जीक्यूटिव्स की चिंता बढ़ा दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि नोएडा का यह कारोबार कितना बड़ा है और इस प्रदर्शन से क्या-क्या दांव पर लगा है। (Noida Labour Protest)
इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पर मंडराया संकट
मजदूरों के विरोध प्रदर्शन की जद में केवल कपड़ा उद्योग ही नहीं आया, बल्कि स्मार्टफोन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली दिग्गज कंपनियां भी प्रभावित हुई हैं। जिस इलाके में यह प्रदर्शन हुआ, वहां डिक्सन टेक्नोलॉजीज, लावा इंटरनेशनल, ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स, ओप्पो, वीवो और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। इन कंपनियों के एग्जीक्यूटिव्स ने चिंता जताते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में अचानक आई इस रुकावट से ऑर्डर्स समय पर पूरे करने में मुश्किल आ सकती है। (Noida Labour Protest)
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होजरी का 55,000 करोड़ रुपये का साम्राज्य
नोएडा का होजरी और गारमेंट सेक्टर भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट हब्स में से एक है। Noida Apparel Export Cluster (NAEC) के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा से हर साल करीब 55,000 करोड़ रुपये के कपड़ों का एक्सपोर्ट होता है। फेस-2 के होजरी कॉम्प्लेक्स में लगभग 500 कंपनियां हैं, जबकि पूरे नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 800 से अधिक एक्सपोर्टर्स और 4,000 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सक्रिय हैं। इंडस्ट्री का लक्ष्य साल 2030 तक इस कारोबार को बढ़ाकर 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है। (Noida Labour Protest)
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6 लाख लोगों की रोजी-रोटी पर असर
रोजगार के लिहाज से गारमेंट सेक्टर नोएडा की लाइफलाइन है। इस इंडस्ट्री में 6 लाख से ज्यादा लोग सीधे तौर पर काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश कामगार देश के विभिन्न राज्यों जैसे यूपी, बिहार और बंगाल से आकर यहां आजीविका चला रहे हैं। प्रदर्शन के कारण काम बंद होने से न केवल इन मजदूरों की दिहाड़ी पर असर पड़ रहा है, बल्कि 8,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क जैसे भविष्य के निवेशों पर भी अनिश्चितता के बादल छाने लगे हैं। (Noida Labour Protest)
भारत के कुल एक्सपोर्ट में 20% की हिस्सेदारी
वैश्विक स्तर पर नोएडा के गारमेंट क्लस्टर की धाक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत के कुल गारमेंट एक्सपोर्ट में नोएडा अकेले 15-20% का योगदान देता है। वर्तमान में हो रही हिंसा और उत्पादन की तालाबंदी से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच गलत संदेश जा सकता है, जो आने वाले समय में ऑर्डर्स की कमी का कारण बन सकता है। (Noida Labour Protest)
क्या कहते हैं अधिकारी और रिपोर्ट्स?
इंडस्ट्री एसोसिएशन के मुताबिक, नोएडा में लेबर और मैनेजमेंट के बीच का संतुलन ही यहां बिजनेस को फलने-फूलने में मदद करता रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और मनीकंट्रोल की बातचीत में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के अधिकारियों ने साफ किया कि अगर यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में लंबी रुकावट आ सकती है, जिससे स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमतों और उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। (Noida Labour Protest)
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