Noida Death Pond: ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। मंदिर के पास बने पानी से भरे गड्ढे में 3 साल के मासूम देवांश डूब गए और उनकी मौत हो गई। परिवार भंडारे में शामिल होने आया था, लेकिन प्रशासन और प्राधिकरण की लापरवाही ने इस छोटे बच्चे की जिंदगी छीन ली। यह घटना केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि सिस्टम की लगातार अनदेखी का नतीजा है।
Noida Death Pond: खुला ‘मौत का गड्ढा’
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के पास यह गड्ढा 6 साल से खुला पड़ा था। मिट्टी निकालने के लिए खोदे गए इस गड्ढे में पानी भर गया, लेकिन इसे ढकने या सुरक्षा उपाय करने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं उठाई। यह गड्ढा 15-20 फीट गहरा था और आसपास कोई बाड़ या चेतावनी का बोर्ड भी नहीं था। पिछले कई सालों में लोग और ग्रामीण अधिकारियों के दरवाजे खटखटाते रहे कि इसे सुरक्षित बनाया जाए, लेकिन उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
Noida Death Pond: अगर समय रहते भरा जाता तो बचता देवांश
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते गड्ढे को भर देता या चारदीवारी बना देता, तो आज देवांश हमारे बीच होता। मासूम अपनी मां के साथ भंडारे में खुशियां मनाने आया था, लेकिन सिस्टम की अनदेखी ने उसकी जिंदगी को छीन लिया।
Noida Death Pond: पहले भी हो चुका हादसा
ग्रेटर नोएडा में यह पहला मामला नहीं है। पिछले साल सेक्टर 150 में खुले गड्ढे में एक और मासूम, युवराज, डूब गया था। तब प्रशासन ने बड़े-बड़े वादे किए थे और शहर को सुरक्षित बनाने का भरोसा दिया था। लेकिन दलेलगढ़ का यह तालाब वही कहानी दोहरा रहा है गहरा गड्ढा, सिस्टम की लापरवाही और मासूम की मौत।
Noida Death Pond: मासूम का परिवार और हादसे की स्थिति
देवांश के पिता अनिल और मां अंजलि अपने छोटे बेटे के साथ भंडारे में शामिल होने आए थे। खेलते-खेलते देवांश मंदिर के पास तालाब की ओर चला गया और फिसलकर पानी में डूब गया। कई मिनट तक बच्चे को खोजा गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
Noida Death Pond: पहले से की गई थी शिकायत
गांव की विकास समिति ने 4 जनवरी 2026 को ग्राम अध्यक्ष के माध्यम से गांव के आसपास बने गड्ढों को भरने और सड़कों के किनारे भरे पानी को हटाने की शिकायत जिला प्रशासन और प्राधिकरण को दी थी। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, और 14 फरवरी को यह हादसा हुआ।
Noida Death Pond: प्राधिकरण का बयान
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बताया कि यह जमीन किसी किसान के नाम पर दर्ज है और सरकारी तालाब नहीं है। इसलिए इसे प्राधिकरण ने तालाब का दर्जा नहीं दिया था। हादसे के बाद वर्क सर्कल की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक मासूम की जान जा चुकी थी।
Noida Death Pond: स्थानीयों की नाराजगी और सवाल
ग्रामीण इस घटना को प्रशासन की लापरवाही मान रहे हैं। उनका सवाल है कि अगर जमीन पर गड्ढा 6 साल से था, पानी भरा था और मासूमों के लिए खतरा था, तो जिम्मेदार अधिकारी इसे क्यों नहीं भरते या सुरक्षित क्यों नहीं बनाते? क्या हर बार मासूमों की मौत के बाद ही प्रशासन जागता है?
Noida Death Pond: सिस्टम की जिम्मेदारी
यह मामला सिर्फ देवांश की मौत का नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी और उसकी संवेदनहीनता पर सवाल उठाता है। ग्रेटर नोएडा में स्मार्ट सिटी की चमक के पीछे ऐसे कई खतरनाक गड्ढे हैं, जो मासूमों के लिए मौत का जाल बन चुके हैं।
Noida Death Pond: प्रशासन और प्राधिकरण की लापरवाही
देवांश की मौत ने एक बार फिर प्रशासन और प्राधिकरण की लापरवाही को उजागर किया है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि शहर में सुरक्षा और बच्चों की जान को प्राथमिकता दी जाए। अब सवाल यही है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक सिर्फ वादों तक सीमित रहेंगे और कब तक सिस्टम में सुधार किया जाएगा, ताकि किसी और मासूम की जिंदगी खतरे में न पड़े।
इस हादसे ने पूरे इलाके में शोक और नाराजगी फैला दी है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि गड्ढों को तुरंत भरकर सुरक्षा के लिए बाड़ और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराई जा सके।



