Mayawati : उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले दो दिनों से भूकंप आया हुआ है। जिसका केंद्र बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती रही है। हाल ही में BSP चीफ द्वारा लिए गए फैसले प्रदेश की राजनीति में एक अलग मोड लाते नजर आ रहे है। उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के सभी पदों से हटाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया है। मायावती के इस फैसले की चर्चा अब दिल्ली तक होने लगी है। इस बीच राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (आरएसएसपी) के प्रमुख स्वामी प्रसाद मौर्य ने मायावती के इस कदम के बाद कहा कि अगर मायावती बाबा साहब के सामाजिक आंदोलन पर चलतीं तो शायद वो प्रधानमंत्री पद की दावेदार होतीं।
Mayawati : एक-एक विधायक को तरस रही मायावती
स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि मायावती बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और स्वाभाविक रूप से यह तय करना उनके अधिकार क्षेत्र का मामला है कि पार्टी की कौन सी जिम्मेदारी किसे दी जाए, तो हम समझते हैं कि इस पर कोई खास टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। आकाश आनंद को पहले भी उन्होंने जिम्मेदारियों से मुक्त किया था। फिर जिम्मेदारियों से मुक्त करते हुए पार्टी से बाहर किया। पहले भी बाहर किया था फिर दोबारा से शामिल किया। यह बहन जी का अपना काम है जो चलता रहता है। भतीजा नहीं तो भाई सही, भाई नहीं तो भतीजा सही। आज बीएसपी का बाबा साहब के मिशन से कोई नाता नहीं रह गया है। आज अगर मायावती बाबा साहब के सामाजिक आंदोलन पर चलतीं तो शायद वह प्रधानमंत्री पद की दावेदार होतीं लेकिन आज वह एक-एक विधायक को तरस रही हैं।
वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने मायावती के फैसले पर कहा कि जिस पार्टी को कांशीराम जी ने बड़ी मेहनत से खड़ा किया था, वह अब पारिवारिक मुद्दों में ही फंस गई है। प्रदेश में दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं, लेकिन पार्टी (बसपा) इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा रही है।
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