Google Golden Baba: प्रयागराज में चल रहा माघ मेला 2026 हर दिन किसी न किसी वजह से चर्चा में बना हुआ है, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं और सोशल मीडिया का सबसे बड़ा आकर्षण बने हैं ‘गूगल गोल्डन बाबा’। सिर से पांव तक सोने-चांदी के आभूषणों से सजे ये बाबा जहां अपने वैभव से सबको हैरान कर रहे हैं, वहीं उनका एक अनोखा संकल्प लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है।
कानपुर निवासी मनोज आनंद महाराज, जिन्हें देशभर में गूगल गोल्डन बाबा के नाम से जाना जाता है, इस बार माघ मेले में अपने अलग ही अंदाज में नजर आ रहे हैं। करीब 5 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, चांदी का मुकुट और हाथ में सोने का लड्डू गोपाल… बाबा का यह रूप संगम तट पर आने वाले हर व्यक्ति की नजरें खींच रहा है।
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Google Golden Baba: सोने-चांदी से सजा पूरा शरीर
Google Golden Baba के पहनावे की बात करें तो उनका हर आभूषण अलग कहानी कहता है। गले में सोने और चांदी से जड़ी भारी मालाएं, रुद्राक्ष की माला, दोनों हाथों में मोटे कंगन और हर उंगली में देवी-देवताओं की आकृतियों वाली अंगूठियां उनके वैभव को और भी खास बना देती हैं। सिर पर सजा चांदी का मुकुट और हाथ में शुद्ध सोने से बनी लड्डू गोपाल की प्रतिमा उनकी पहचान बन चुकी है।
बाबा का दावा है कि उनके शरीर पर मौजूद आभूषणों की कीमत करीब 5 करोड़ रुपये है। माघ मेले में जब वे अपने शिविर से बाहर निकलते हैं, तो भीड़ अपने आप उनके आसपास जमा हो जाती है।
Google Golden Baba: योगी आदित्यनाथ को PM बनाने का अटूट संकल्प
गूगल गोल्डन बाबा केवल अपने सोने-चांदी के लिए ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि उनके एक संकल्प ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। बाबा का कहना है कि वे पहले 5 लाख रुपये की चांदी की चप्पल पहनते थे, लेकिन अब उन्होंने नंगे पांव रहने का प्रण लिया है।
बाबा साफ शब्दों में कहते हैं, ‘जब तक योगी आदित्यनाथ देश के प्रधानमंत्री नहीं बन जाते, तब तक मैं चप्पल नहीं पहनूंगा।’ उनका यह संकल्प माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे गहरी आस्था मानते हैं, तो कुछ इसे बाबा की अलग सोच का प्रतीक बताते हैं।
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Google Golden Baba: लड्डू गोपाल ही हैं सुरक्षा कवच
करीब 20 वर्षों से सोना धारण कर रहे गूगल गोल्डन बाबा करौली वाले बाबा के भक्त बताए जाते हैं। इतने महंगे आभूषण पहनकर खुलेआम घूमने पर सुरक्षा को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। लेकिन बाबा का जवाब बेहद सादा और आस्था से भरा हुआ होता है।
जब उनसे पूछा गया कि चोरी या खतरे का डर नहीं लगता, तो वे मुस्कुराते हुए कहते हैं,’मुझे चोरी का कोई डर नहीं है, मेरे रक्षक ये लड्डू गोपाल ही हैं।’ उनके लिए यह सोने की मूर्ति केवल आभूषण नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
Google Golden Baba: वैराग्य से अलग सोच, परंपरा से जुड़ा तर्क
आमतौर पर साधु-संतों को सादगी और त्याग का प्रतीक माना जाता है, लेकिन गूगल गोल्डन बाबा इस धारणा से अलग नजर आते हैं। उनका कहना है कि वे क्षत्रिय हैं और उनके पूर्वजों में सोना पहनना शौर्य, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक रहा है। उनके अनुसार, सोना पहनना उनके लिए दिखावा नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था का हिस्सा है। बाबा मानते हैं कि हर व्यक्ति को अपनी मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है।
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श्रद्धालुओं में सेल्फी और दर्शन का क्रेज
माघ मेले में बाबा के शिविर पर हर समय श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा सकती है। कोई आशीर्वाद लेने आता है, तो कोई उनके साथ तस्वीर खिंचवाने। सोशल मीडिया के दौर में बाबा का यह अनोखा रूप युवाओं के बीच भी खासा लोकप्रिय हो गया है।
लोग उनके वीडियो और फोटो सोशल प्लेटफॉर्म पर जमकर शेयर कर रहे हैं, जिससे गूगल गोल्डन बाबा की पहचान माघ मेले से निकलकर देशभर में फैलती जा रही है।
Google Golden Baba: धर्म, राजनीति और वैभव का अनोखा संगम
माघ मेला 2026 में Google Golden Baba का अंदाज धर्म, राजनीति और वैभव का ऐसा मेल पेश करता है, जो कम ही देखने को मिलता है। एक तरफ आस्था और साधना, दूसरी तरफ करोड़ों का सोना और बड़ा राजनीतिक संकल्प यही वजह है कि बाबा इस बार मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बन गए हैं।
प्रयागराज के संगम तट पर Google Golden Baba ने यह साबित कर दिया है कि माघ मेला सिर्फ स्नान और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आस्था के साथ-साथ अनोखे किरदारों की पहचान भी है, जो सालों तक लोगों की यादों में बसे रहते हैं।
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