Banke Bihari Temple controversy: ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में बुधवार को हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मंदिर की हाई पावर कमेटी ने आदेश दिया कि बांके बिहारी महाराज को गर्भगृह से जगमोहन में विराजमान किया जाए। इस आदेश के बाद राजभोग सेवक ने इसे लागू किया और महाराज को जगमोहन में विराजमान कर भक्तों को दर्शन कराए। लेकिन गोस्वामी समाज और भक्तों की नाराजगी ने पूरे घटनाक्रम को हंगामे में बदल दिया।
Banke Bihari Temple controversy: हाई पावर कमेटी का आदेश और विरोध
हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष, रिटायर जज अशोक कुमार, बुधवार दोपहर को मंदिर पहुंचे। उन्होंने शयनभोग सेवायत और अन्य गोस्वामियों के साथ बैठक की। इस बैठक का मकसद था कि बांके बिहारी महाराज को नियमित रूप से गर्भगृह से जगमोहन में विराजमान किया जाए।
हालांकि शयनभोग सेवायत इस फैसले के पक्ष में नहीं थे। बैठक के बाद सभी गोस्वामी समाज के सदस्य जगमोहन पहुंचे और वहां उन्होंने कई खामियां देखीं। उनका कहना था कि यह परंपरा के खिलाफ है और महाराज को केवल विशेष त्योहारों पर ही जगमोहन में विराजमान किया जाता है।
Banke Bihari Temple controversy: गोस्वामी समाज ने जताई आपत्ति
गोस्वामी समाज ने गर्भगृह के गेट पर जंजीर लगाने का विरोध किया। उनका कहना था कि मंदिर में पहले कभी जंजीर नहीं लगाई गई थी और महाराज को जंजीर में बांधना परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाई पावर कमेटी अपना काम ठीक से नहीं कर रही है और इसे भक्तों और समाज की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
गोस्वामी समाज ने साफ कहा कि वे महाराज को रोजाना जगमोहन में विराजमान नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जो लोग महाराज को जगमोहन में विराजमान कर रहे हैं, वे कमेटी के सदस्य हैं और उनका नाम वर्धन गोस्वामी है।
Banke Bihari Temple controversy: ताला और भक्तों का हंगामा
इस विवाद के कारण गर्भगृह का ताला लगभग तीन घंटे तक बंद रहा। मंदिर खुलने का निर्धारित समय शाम 4:30 बजे था। जैसे ही भक्त मंदिर पहुंचे और गर्भगृह पर ताला देखा, उन्होंने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ भक्तों ने योगी सरकार के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए।
कुछ भक्तों ने तो यह तक कह दिया कि महाराज को जंजीर में बांधना गलत है, अगर कोई बांधना चाहता है तो हमें ही बांध दो। हंगामे और विरोध के बीच हाई पावर कमेटी को झुकना पड़ा और मंदिर खुलने से लगभग आधा घंटे पहले गर्भगृह का ताला खोल दिया गया। इसके बाद सभी गोस्वामी और भक्त संतुष्ट दिखाई दिए।
Banke Bihari Temple controversy: मंदिर की परंपरा और भावनाओं का महत्व
गोस्वामी समाज ने जोर देकर कहा कि बांके बिहारी महाराज की परंपरा और भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। उनका मानना है कि मंदिर की परंपरा को बदलना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। समाज ने यह भी कहा कि केवल विशेष अवसरों पर ही महाराज को जगमोहन में विराजमान किया जाना चाहिए। हाई पावर कमेटी की इस कार्रवाई ने भक्तों में असंतोष और सवाल खड़े कर दिए कि क्या मंदिर प्रशासन भक्तों और समाज की भावनाओं को समझ रहा है या सिर्फ आदेशों का पालन कर रहा है।
Banke Bihari Temple controversy: भक्तों का भरोसा और मंदिर की प्रतिष्ठा
मंदिर भक्तों के लिए सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी आस्था का प्रतीक है। इस विवाद के बीच भक्तों ने साफ किया कि वे मंदिर की परंपरा और महाराज की गरिमा का सम्मान चाहते हैं। मंदिर में दर्शनों के दौरान भक्तों ने सोशल मीडिया पर भी नाराजगी जताई और परंपरा का पालन करने की अपील की।
Banke Bihari Temple controversy: भविष्य की दिशा
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि मंदिर प्रशासन और हाई पावर कमेटी को गोस्वामी समाज और भक्तों की भावनाओं का पूरा ध्यान रखना होगा। सभी पक्षों की संतुष्टि के बिना कोई भी नया निर्णय विवाद को जन्म दे सकता है। गोस्वामी समाज ने साफ किया है कि वे अपने ठाकुर को सिर्फ विशेष त्योहारों और अवसरों पर ही जगमोहन में विराजमान करेंगे। मंदिर प्रशासन और हाई पावर कमेटी को यह समझना होगा कि महाराज की परंपरा और भक्तों की भावनाओं के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
बांके बिहारी मंदिर में बुधवार का दिन श्रद्धालुओं और गोस्वामी समाज के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। हाई पावर कमेटी ने आदेश जारी किया, लेकिन भक्तों और समाज के विरोध के चलते ताला खोलने पर ही सुलह हो सकी। यह घटना यह दर्शाती है कि धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक आदेश के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए मंदिर प्रशासन को गोस्वामी समाज और भक्तों के साथ बेहतर संवाद और सहयोग करना होगा।



