Ashutosh Brahmachari Allegations: उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक विवादों का नया मामला सामने आया है। इस बार चर्चा का केंद्र बने हैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद। उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं उनके ही समकालीन संत और रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी। ये आरोप नाबालिग बच्चों के यौन शोषण और अनुचित व्यवहार से जुड़े हैं। मामले को लेकर प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट में भी शिकायत दर्ज की गई है।
Ashutosh Brahmachari Allegations: कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी?
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के प्रमुख शिष्य हैं। वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। उनका जन्म शामली के एक साधारण पंडित परिवार में हुआ था। उनके पिता बस कंडक्टर थे। 2022 में आशुतोष ब्रह्मचारी ने रामभद्राचार्य से दीक्षा लेकर सन्यासी जीवन अपनाया। इसके बाद से वे धार्मिक और सामाजिक मामलों में सक्रिय हो गए और मुख्य रूप से श्री कृष्ण जन्मभूमि परियोजना में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
Ashutosh Brahmachari Allegations : आरोपों की पृष्ठभूमि
आरोपों के अनुसार, माघ मेले के दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी को दो नाबालिग बच्चे मिले जिन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी बताई। आशुतोष का कहना है कि शंकराचार्य के एक अन्य शिष्य मुकुंदानंद के जरिए बच्चों को ‘गुरु सेवा’ के नाम पर गुमराह किया जाता था। इसके अलावा, उनके पास इस पूरे मामले की सीडी भी मौजूद है, जिसे वे कोर्ट में पेश करेंगे।
Ashutosh Brahmachari Allegations: शंकराचार्य का पलटवार
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आशुतोष के आरोपों को नकारते हुए इसे सोची-समझी साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ एक समूह काम कर रहा है, जो उनकी धार्मिक और सामाजिक मुहिम को रोकना चाहता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके प्रयासों से गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने में लोगों को असुविधा और विरोध महसूस हुआ है। शंकराचार्य के अनुसार, जब विरोधियों को शास्त्रीय और कानूनी दांव-पेच में फंसा नहीं पाए, तो अब इस तरह के ‘नीच और झूठे’ आरोप लगाए जा रहे हैं।
Ashutosh Brahmachari Allegations: विवाद की शुरुआत
यह विवाद 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दौरान शुरू हुआ। आरोप है कि उस दिन पुलिस ने शंकराचार्य को स्नान स्थल तक जाने से रोक दिया। इसके अलावा उनके भक्तों के साथ भी बदसलूकी हुई। इस घटना के बाद शंकराचार्य कई दिनों तक अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे रहे। इसी दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उन्हें ‘फर्जी शंकराचार्य’ कहकर निशाना बनाया। इस घटना ने दोनों संतों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा दिया।
Ashutosh Brahmachari Allegations: सामाजिक और धार्मिक प्रभाव
इस मामले ने उत्तर प्रदेश और आसपास के धार्मिक समुदायों में हलचल पैदा कर दी है। लोग अब इसे केवल दो संतों के बीच का विवाद नहीं मान रहे, बल्कि इसे बड़े सामाजिक और धार्मिक विवाद के रूप में देख रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह के आरोप संतों की प्रतिष्ठा पर असर डाल सकते हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक और सामाजिक कारणों से जोड़कर देख रहे हैं।
Ashutosh Brahmachari Allegations : कोर्ट में मामला
आरोपों को लेकर आशुतोष ब्रह्मचारी ने पॉक्सो कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। कोर्ट अब इस मामले की जांच करेगी और साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। आशुतोष का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल न्याय पाना है और बच्चों के हितों की रक्षा करना है।
यह विवाद धार्मिक, सामाजिक और कानूनी दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। इस घटना ने यह दिखा दिया कि धार्मिक संतों के बीच व्यक्तिगत और संगठनात्मक मतभेद कैसे बड़े विवाद में बदल सकते हैं। कोर्ट, प्रशासन और समाज की निगाहें अब इस मामले पर टिकी हैं। माघ मेले से शुरू हुए इस विवाद का असर आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। चाहे यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में कितना आगे बढ़े, यह निश्चित है कि इसे लेकर लोगों की नजरें और चर्चाएं बनी रहेंगी।



