Australia Crisis: दुनिया की सबसे खतरनाक क्रिकेट टीम मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया इस वक्त खुद टूर्नामेंट से बाहर होने के कगार पर खड़ी है। वही टीम, जिसके खिलाफ उतरने से पहले विरोधी खेमों में दबाव साफ दिखता था, इस बार मैदान पर फीकी नजर आ रही है। प्रदर्शन में वो धार नहीं दिख रही, जिसने सालों तक उसे क्रिकेट की सबसे ताकतवर ताकत बनाए रखा।
टी-20 वर्ल्ड कप में हालात ऐसे बन चुके हैं कि ऑस्ट्रेलिया की किस्मत अब सिर्फ उसके अपने प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर हो गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आखिर वर्ल्ड क्रिकेट का यह दबदबे वाला देश अचानक संघर्ष करता क्यों दिख रहा है?
कप्तान की गैरमौजूदगी ने बिगाड़ा संतुलन
ऑस्ट्रेलिया की कमजोरी की शुरुआत कप्तान मिचेल मार्श की गैरमौजूदगी से हुई। जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में उनके न खेलने से टीम का संतुलन बुरी तरह प्रभावित हुआ। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भी माना कि आयरलैंड और जिम्बाब्वे के खिलाफ मार्श का न होना टीम के लिए भारी पड़ा। वह सिर्फ कप्तान ही नहीं, बल्कि टॉप ऑर्डर बल्लेबाज और भरोसेमंद ऑलराउंडर भी हैं। श्रीलंका के खिलाफ वापसी पर उन्होंने 54 रन बनाए, लेकिन तब तक टीम दबाव में आ चुकी थी। (Australia Crisis)
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बल्लेबाजी की अस्थिरता बनी परेशानी
श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में ट्रैविस हेड और मार्श ने मजबूत शुरुआत दिलाई, लेकिन इसके बाद मिडिल ऑर्डर पूरी तरह बिखर गया। 181 रन का स्कोर, जो आसानी से 200 पार जा सकता था, वहीं रुक गया। यह सिर्फ तकनीकी कमी नहीं बल्कि दबाव में टूटती मानसिकता की कहानी भी थी। (Australia Crisis)
गेंदबाजी में दिखी सबसे बड़ी कमी
ऑस्ट्रेलिया की ताकत उसकी गेंदबाजी रही है, लेकिन इस टूर्नामेंट में टीम अपने तीन प्रमुख गेंदबाजों के बिना मैदान में उतरी। मिचेल स्टार्क अब रिटायर है। पैट कमिंस, जोश हेजलवुड चोटिल हैं। इनकी अनुपस्थिति ने गेंदबाजी आक्रमण को कमजोर बना दिया। (Australia Crisis)
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टीम चयन पर भी उठे सवाल
रणनीति भी टीम की परेशानी का कारण बनी। स्टीव स्मिथ को टीम में शामिल किया गया, लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला। वहीं जिम्बाब्वे के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले मैथ्यू शॉर्ट को भी बाहर रखा गया। ऐसे फैसलों ने टीम मैनेजमेंट की सोच पर सवाल खड़े कर दिए। (Australia Crisis)
अब सुपर-8 की राह बेहद कठिन
ग्रुप बी में श्रीलंका पहले ही क्वालीफाई कर चुका है। जिम्बाब्वे के पास 4 अंक हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया 3 में से 2 मुकाबले हार चुका है। अब आखिरी मैच ओमान से है, लेकिन सिर्फ जीत काफी नहीं होगी।ऑस्ट्रेलिया को कम से कम 100 रन से जीतना होगा। या 8-9 विकेट से जीत दर्ज करनी होगी। तभी नेट रन रेट के आधार पर सुपर-8 की उम्मीद जिंदा रह सकती है।
प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है मुकाबला
वनडे में 6 बार वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली ऑस्ट्रेलिया टी-20 में सिर्फ 2021 में ट्रॉफी जीत पाई है। अब ओमान के खिलाफ मुकाबला सिर्फ अंक तालिका की लड़ाई नहीं, बल्कि टीम के सम्मान और भविष्य की परीक्षा बन चुका है। (Australia Crisis)



