Mahashivratri Story: महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा और चेतना के मिलन का उत्सव है। यह वह पावन रात्रि मानी जाती है जब संपूर्ण सृष्टि ‘ॐ नमः शिवाय’ के जाप से गूंज उठती है और शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का स्मरण किया जाता है। मंदिर दीपों से जगमगाते हैं, भक्त रात्रि भर जागकर भगवान शिव की आराधना करते हैं और इस पावन अवसर को शिव-पार्वती के विवाह दिवस के रूप में मनाते हैं।
लेकिन शिव और पार्वती का यह मिलन केवल एक वैवाहिक कथा नहीं है। यह त्याग, तपस्या, प्रेम और आत्म-परिवर्तन की आध्यात्मिक यात्रा है। यह हमें सिखाता है कि सच्चे मिलन से पहले आत्मा का शुद्ध होना आवश्यक है।
जब शिव ने ली पार्वती की परीक्षा
जब पार्वती की तपस्या ने देवताओं को भी प्रभावित कर दिया, तब शिव ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने का निश्चय किया। कुमारसंभवम् के अनुसार, शिव एक ऋषि का वेश धारण कर पार्वती के सामने आए और शिव के दोष गिनाने लगे उन्होंने शिव को बेघर, राख से सना और भूतों से घिरा बताया। लेकिन पार्वती अडिग रहीं। उन्होंने शांत भाव से शिव के वैराग्य और उनके ब्रह्मांडीय स्वरूप का वर्णन किया। यह स्पष्ट हो गया कि उनका प्रेम बाहरी रूप से नहीं, बल्कि सत्य के ज्ञान से जुड़ा था। (Mahashivratri Story)
Rajpal Yadav Case: संकट में कॉमेडी किंग, तिहाड़ में बंद राजपाल यादव के लिए आगे आए एएसपी अनुज चौधरी
शिव का आंतरिक परिवर्तन
राजा हिमवान और रानी मैना के घर जन्मी पार्वती का जीवन राजसी वैभव से भरा हुआ था, लेकिन उनका हृदय उस विरक्त योगी की ओर आकर्षित हुआ जो संसारिक मोह-माया से दूर थे। (Mahashivratri Story) उन्होंने सुख-सुविधाओं का त्याग कर भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या का मार्ग अपनाया। शिव पुराण के अनुसार, पार्वती ने बर्फीली हवाओं में ध्यान किया, भोजन तक का त्याग किया और अपने संकल्प को साधना में बदल दिया यह प्रेम नहीं, बल्कि आत्म-उत्थान की आध्यात्मिक यात्रा थी। (Mahashivratri Story)

शिव-शक्ति का मिलन और ब्रह्मांडीय संतुलन
जब पार्वती की तपस्या ने देवताओं को भी प्रभावित कर दिया, तब शिव ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने का निश्चय किया। कुमारसंभवम् के अनुसार, वे एक ऋषि का वेश धारण कर पार्वती के समक्ष प्रकट हुए और शिव के दोषों का वर्णन करते हुए उन्हें बेघर, राख से सना और भूतों से घिरा बताया। लेकिन पार्वती अडिग रहीं और शांत भाव से शिव के वैराग्य तथा उनके ब्रह्मांडीय स्वरूप का वर्णन किया, जिससे स्पष्ट हो गया कि उनका प्रेम बाहरी रूप से नहीं, बल्कि सत्य की गहराई से जुड़ा था। (Mahashivratri Story)
महाशिवरात्रि का गहरा संदेश
सती के वियोग का दुःख शिव के भीतर गहराई तक था और पार्वती को स्वीकार करने से पहले उन्हें अपने इस दर्द से ऊपर उठना पड़ा। यह केवल पार्वती की ही नहीं, बल्कि स्वयं शिव की भी आंतरिक परीक्षा थी। जब उन्होंने पार्वती को स्वीकार किया, तब यह केवल विवाह नहीं था, बल्कि उपचार, संतुलन और सृष्टि के पुनर्संयोजन का प्रतीक बन गया। (Mahashivratri Story)



