Holika Dahan Story: होली का त्योहार सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह झूठ पर सच्चाई की जीत का प्रतीक है। हर साल होलिका दहन के मौके पर एक पौराणिक कहानी सुनाई जाती है, जिसमें बताया गया है कि कैसे अहंकार खत्म हुआ और भक्ति की जीत हुई। इस कहानी में होलिका, प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप शामिल हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब होलिका को ब्रह्मा से वरदान मिला था कि वह आग में नहीं जलेगी, तो वह कैसे जली? और प्रह्लाद आग में बैठने के बाद भी कैसे बिना किसी नुकसान के बच गया? आइए पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।
Holika Dahan Story: हिरण्यकश्यप का अहंकार और प्रह्लाद की भक्ति
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप एक शक्तिशाली राक्षस राजा था। उसने कठोर तपस्या की और ब्रह्मा से वरदान पाया कि कोई भी इंसान, कोई जानवर, कोई भी हथियार, दिन हो या रात, उसे नहीं मार सकता। इस वरदान ने उसे घमंडी बना दिया था।
वह चाहता था कि पूरा राज्य उसे भगवान माने, लेकिन उसका बेटा प्रह्लाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। प्रह्लाद हमेशा भगवान विष्णु का नाम लेता था। हिरण्यकश्यप को यह बिल्कुल पसंद नहीं था।
Holika Dahan Story: प्रह्लाद को मारने की कई नाकाम कोशिशें
हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माना, तो उसने उसे मारने की कई कोशिशें कीं। कभी उसने उसे पहाड़ से नीचे फेंकवा दिया, कभी जहरीले सांपों से घेरवा दिया, और कभी हाथियों से कुचलवाने की कोशिश की।
लेकिन हर बार, भगवान विष्णु की कृपा से, प्रह्लाद सही-सलामत बच गया। इससे हिरण्यकश्यप और भी ज्यादा गुस्सा हो गया। होलिका को आग से न जलने का वरदान मिला था।
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Holika Dahan Story: होलिका को मिला था आग से न जलने का वरदान
हिरण्यकश्यप की बहन, होलिका को ब्रह्मा ने वरदान दिया था कि वह आग से नहीं जलेगी। यह वरदान उसके पहने हुए एक खास कपड़े (आग से बचाने वाली चादर) की वजह से था।
हिरण्यकश्यप ने प्लान बनाया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठेगी। प्रह्लाद आग में जल जाएगा, जबकि होलिका सुरक्षित बाहर निकल आएगी।
Holika Dahan Story: तो फिर क्यों जली होलिका?
कहानी में यहीं से सबसे महत्वपूर्ण मोड़ आता है। ब्रह्मा का वरदान तभी काम करता था जब होलिका अकेली आग में जाए। लेकिन उसने इसका गलत इस्तेमाल किया। वह एक मासूम बच्चे और भगवान के एक भक्त को मारने के इरादे से आग में बैठ गई।
कहानी के अनुसार, जैसे ही आग जलाई गई, दिव्य कपड़ा प्रह्लाद के ऊपर उड़ गया। नतीजतन, होलिका जल गई, और प्रह्लाद बच गया। इस घटना से हमें यह सीख मिलती है कि जो कोई भी वरदान या शक्ति का गलत इस्तेमाल करता है, वह बर्बाद हो जाता है।
Holika Dahan Story: प्रह्लाद कैसे बचा?
प्रह्लाद अपनी अटूट भक्ति और भगवान विष्णु में अटूट विश्वास की वजह से बच गया। वह आग में भी शांति से भगवान का नाम जपता रहा। भक्ति की शक्ति ने आग की लपटों को भी बेअसर कर दिया। यह कहानी दिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास किसी भी खतरे से बचा सकता है।
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Holika Dahan Story: भगवान नरसिंह का अवतार और हिरण्यकश्यप का अंत
होलिका जलने के बाद भी हिरण्यकश्यप का गुस्सा कम नहीं हुआ। उसने प्रह्लाद से पूछा, ‘तुम्हारा भगवान कहां है?’ जब प्रह्लाद ने जवाब दिया कि भगवान हर जगह हैं, तो हिरण्यकश्यप ने खंभे पर मारा। फिर खंभे से नरसिंह का अवतार प्रकट हुआ।
भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप को शाम के समय (न दिन, न रात), दरवाजे पर (न अंदर, न बाहर), अपने नाखूनों से (न हथियार, न शस्त्र) मार डाला। इस तरह ब्रह्मा के वरदान की शर्तें पूरी हुईं और अधर्म का अंत हुआ।
Holika Dahan Story: होलिका जलाने का आध्यात्मिक महत्व
होलिका दहन सिर्फ एक पौराणिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमें एक गहरा संदेश देती है कि, अहंकार और अधर्म का अंत होना तय है। सच्ची भक्ति की हमेशा जीत होती है। शक्ति का गलत इस्तेमाल विनाश की ओर ले जाता है। सच्चाई और विश्वास किसी भी संकट से बड़े हैं। आज भी होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है, जिसमें लोग सभी बुराइयों को जलाने का संकल्प लेते हैं।
Holika Dahan Story: होलिका दहन से सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर दिल में सच्ची आस्था हो, तो भगवान खुद रक्षा करते हैं। होलिका के पास वरदान था, लेकिन उसके इरादे गलत थे। दूसरी ओर, प्रह्लाद के पास कोई शक्ति नहीं थी, सिर्फ भक्ति थी और वही सबसे बड़ी शक्ति साबित हुई।
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