Sadhvi Prem Baisa Case: जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा के निधन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। शनिवार शाम पुलिस कमिश्नर Om Prakash ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम (SIT) की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की। रिपोर्ट में सामने आया कि साध्वी की मौत (Sadhvi Prem Baisa Case) का मुख्य कारण हार्ट अटैक था, लेकिन इलाज के दौरान बरती गई चिकित्सकीय लापरवाही ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि बिना डॉक्टर की विधिवत पर्ची के इंजेक्शन लगाया गया था और संबंधित पर्ची भी उपलब्ध नहीं है। इस आधार पर प्राथमिक रूप से कंपाउंडर की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
SIT जांच में क्या सामने आया?
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी, जिसकी अगुवाई छवि शर्मा ने की। टीम ने मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa Case) को फेफड़ों की गंभीर बीमारी थी। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट आया, जो हार्ट अटैक का कारण बना। हालांकि, जांच में यह भी पाया गया कि इंजेक्शन लगाने में निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
बिना पर्ची लगाए गए इंजेक्शन ने बढ़ाया संदेह
पुलिस के मुताबिक, जिस कंपाउंडर ने इंजेक्शन लगाया, उसने किसी पंजीकृत डॉक्टर की लिखित पर्ची के बिना दवा दी। संबंधित पर्ची की कोई रिकॉर्डिंग या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। प्राथमिक जांच में कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित (देवीलाल सिंह) की भूमिका लापरवाहीपूर्ण पाई गई है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर ने साफ शब्दों में कहा कि चिकित्सकीय लापरवाही (Sadhvi Prem Baisa Case) किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
घटना 28 जनवरी की है। जोधपुर शहर के बोरानाडा क्षेत्र स्थित आरती नगर आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa Case) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें जुकाम और सांस लेने में परेशानी की शिकायत थी। इलाज के लिए एक कंपाउंडर को बुलाया गया, जिसने मौके पर दो इंजेक्शन लगाए। परिजनों के अनुसार, इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद उनकी हालत और ज्यादा गंभीर हो गई। इसके बाद उन्हें पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजन शव को वापस आश्रम ले गए, लेकिन पुलिस हस्तक्षेप के बाद शव को महात्मा गांधी अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। 29 जनवरी को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
मेडिकल रिपोर्ट और कानूनी कार्रवाई
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत (Sadhvi Prem Baisa Case) का कारण हार्ट अटैक बताया गया है। हालांकि, जांच में यह भी सामने आया कि इंजेक्शन लगाए जाने की प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही ने स्वास्थ्य स्थिति को और बिगाड़ दिया। पुलिस अब संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है। विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिना योग्य चिकित्सकीय परामर्श के दवा दी गई है, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
चिकित्सा प्रणाली पर उठे सवाल
यह मामला (Sadhvi Prem Baisa Case) केवल एक व्यक्ति की मृत्यु तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या धार्मिक संस्थानों या आश्रमों में आपात स्थिति के लिए पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था मौजूद है? बिना योग्य डॉक्टर की निगरानी के इंजेक्शन देना कितना सुरक्षित है यह बहस का विषय बन गया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, मामले की प्रशासनिक स्तर पर भी समीक्षा की जा सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करने की प्रक्रिया में है। यदि लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa Case) के निधन ने न केवल उनके अनुयायियों को शोक में डाला है, बल्कि चिकित्सा लापरवाही के मुद्दे को भी एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इस मामले से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है।
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