Arun Jaitley: लोकसभा में आरोप-प्रत्यारोप जारी है। लोकसभा में चल रहे बहस बाजी के बीच कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कृषि कानून का मुद्दा उठा दिया है। इस मुद्दे पर बात करते हुए राहुल गांधी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के दिवंगत नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) को बीच में लाया और उनपर आरोप भी लगाया, जिसका पलटवार अब अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली ने की है।
राहुल गांधी ने अरुण जेटली पर लगाया आरोप
कृषि कानून मुद्दे पर बात करते हुए राहुल गांधी ने अरुण जेटली पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह कृषि कानून के खिलाफ लड़ रहे थे तब अरुण जेटली को धमकाने के लिए भेजा गया था। राहुल गांधी का कहना है कि अरुण जेटली ने उनसे कहा था कि अगर वह सरकार का विरोध और कृषि कानून के खिलाफ लड़ते रहे तो उनपर कार्यवाई की जाएगी।
#WATCH | Delhi: At the Annual Legal Conclave- 2025, Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, “I remember when I was fighting the farm laws, Arun Jaitley ji was sent to me to threaten me. He told me “if you carry on opposing the govt, fighting the farm laws, we will have… pic.twitter.com/8RJWmHo9fE
— ANI (@ANI) August 2, 2025
रोहन जेटली ने राहुल गांधी को किया शर्मशार
लोकसभा में राहुल गांधी अरुण जेटली पर बहुत बड़ा आरोप लगाया है। अब इस आरोपों को गलत और देश को सच दिखाने के लिए खुद दिवंगत अरुण जेटली बेटे रोहन जेटली ने दस्तक दी है।
Rahul Gandhi now claims my late father, Arun Jaitley, threatened him over the farm laws.
Let me remind him, my father passed away in 2019. The farm laws were introduced in 2020. More importantly, it was not in my father’s nature to threaten anyone over an opposing view. He was a…— Rohan Jaitley (@rohanjaitley) August 2, 2025
रोहन जेटली ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हुए लिखा कि राहुल गांधी को याद दिला दूँ कि अरुण जेटली का देहांत 2019 में हुआ था और कृषि कानून 2020 में पेश किया गया था।

Arun Jaitley कट्टर लोकतांत्रिक व्यक्ति थे
रोहन ने आगे कहा कि मेरे पिता का स्वाभाव किसी को भी विरोधी विचार के लिए धमकाना नहीं था। वह एक कट्टर लोकतांत्रिक व्यक्ति थे और हमेशा आम सहमति बनाने में विश्वास रखते थे। वह सभी के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र और खुली चर्चा का आह्वान करते थे। वह पहले ऐसे थे और आज भी उनकी विरासत वैसी ही है।
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