PV Narasimha Rao: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक सहित अन्य महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। सदन को संबोधित करते हुए शाह ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता PV Narasimha Rao की जमकर प्रशंसा की। शाह ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि साल 1992 में महिलाओं को पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का क्रांतिकारी कदम नरसिम्हा राव ही लेकर आए थे। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा अफसोस जताया कि कांग्रेस के प्रधानमंत्री होने के बावजूद, पार्टी ने उन्हें कभी वह सम्मान और स्थान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे।
अमित शाह का यह भाषण केवल एक प्रशंसा मात्र नहीं था, बल्कि गांधी परिवार के खिलाफ एक तीखा हमला भी था। उन्होंने सदन में नरसिम्हा राव के अंतिम दिनों का जिक्र करते हुए कांग्रेस के ‘चाल और चरित्र’ पर सवाल उठाए। शाह ने कहा कि जिस नेता ने आर्थिक संकट के समय भारत को नई दिशा दी, उसके निधन के बाद कांग्रेस मुख्यालय के दरवाजे तक नहीं खोले गए। इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है, जिसने नरसिम्हा राव के ऐतिहासिक योगदान और उनके साथ हुए व्यवहार को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। (PV Narasimha Rao)
आर्थिक सुधारों के जनक और ‘संकटमोचक’ राव
PV Narasimha Rao भारत के 9वें प्रधानमंत्री थे, जिनका कार्यकाल 1991 से 1996 तक रहा। राजीव गांधी की हत्या के बाद जब कांग्रेस और देश सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे, तब राव ने ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में ही भारत ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) के दौर में कदम रखा, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि राव के दूरदर्शी फैसलों ने ही आधुनिक भारत की समृद्धि की नींव रखी थी।
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‘कांग्रेस मुख्यालय का गेट नहीं खुला’
अमित शाह ने राव के निधन के बाद के घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कांग्रेस को घेरा। 23 दिसंबर 2004 को राव के निधन के बाद, दिल्ली में उनके अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी गई। अमित शाह ने कहा, ‘वे कहने को कांग्रेस के प्रधानमंत्री थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें कभी अपना पीएम नहीं माना। उनके अंतिम समय में जो व्यवहार हुआ, वह इतिहास में दर्ज है।’ सदन में इस बात का भी जिक्र हुआ कि कैसे 24 अकबर रोड (कांग्रेस मुख्यालय) पर राव के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए लाने पर गेट बंद रखे गए थे और आधे घंटे तक उनकी लाश बाहर सड़क पर इंतजार करती रही थी।

सोनिया गांधी के साथ खटास और ‘हाफ लायन’ का संघर्ष
विनय सीतापति की किताब ‘द हाफ लायन’ और संजय बारू की ‘1991 हाउ PV Narasimha Rao मेड हिस्ट्री’ का संदर्भ देते हुए यह स्पष्ट किया गया कि कैसे राव और सोनिया गांधी के संबंधों में कड़वाहट आ गई थी। अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने राव को केवल बाबरी मस्जिद विध्वंस का दोषी ठहराकर किनारा कर लिया, जबकि उन्होंने हमेशा पार्टी की नीतियों का पालन किया था। एम्स में इलाज के दौरान राव ने नाराजगी जताते हुए कहा था, ‘आप लोग मुझ पर मस्जिद तुड़वाने का इल्जाम लगाते हैं और अब यहां पानी पिलाने आए हैं। किससे गलतियां नहीं होतीं? मुझे ऐसी ग़लती के लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है, जो मैंने की ही नहीं?’
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बीजेपी का ‘राव कार्ड’ और नया स्मारक
भारतीय जनता पार्टी अक्सर नरसिम्हा राव के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरती रही है। अमित शाह ने यह याद दिलाया कि मोदी सरकार के आने के बाद ही 2015 में नई दिल्ली के ‘एकता स्थल’ पर राव के सम्मान में एक स्मारक बनवाया गया। शाह का तर्क था कि कांग्रेस गांधी परिवार के बाहर के किसी भी नेता को बड़ा ओहदा या सम्मान देने की मानसिकता नहीं रखती, चाहे वह नरसिम्हा राव हों या कोई और। (PV Narasimha Rao)
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