NCERT Book Controversy: एनसीईआरटी (NCERT) की एक पाठ्यपुस्तक को लेकर उठे NCERT Book Controversy ने अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नया मोड़ ले लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे तुरंत स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता और संस्थान की गरिमा से समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यह मामला केवल एक गलती का नहीं, बल्कि संभावित साज़िश का भी हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर बिना जांच-पड़ताल के माफी स्वीकार कर ली गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
क्या है पूरा NCERT Book Controversy?
NCERT Book Controversy कक्षा 8 की सोशल साइंस पार्ट-2 की पाठ्यपुस्तक से जुड़ा है। इस किताब के कुछ अंशों और सामग्री को लेकर आपत्ति जताई गई थी। आरोप था कि किताब में शामिल कुछ हिस्से तथ्यों से परे हैं या संवेदनशील विषयों को ठीक तरह से प्रस्तुत नहीं करते। मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी दोनों हरकत में आए।
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सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही NCERT Book Controversy बढ़ा, एनसीईआरटी ने संबंधित पुस्तक की बिक्री रोकने का फैसला किया। यह भी जानकारी सामने आई है कि कुल 2.25 लाख प्रतियां छापी गई थीं, जिनमें से 2,24,962 प्रतियां अभी तक इन्वेंट्री में थीं। इन सभी को वेयरहाउस में वापस भेज दिया गया है।
बिक चुकी प्रतियों को वापस लेने की कोशिश
सूत्रों का कहना है कि लगभग 38 प्रतियां पहले ही बाजार में बिक चुकी थीं। अब NCERT इन प्रतियों को भी वापस लेने की प्रक्रिया में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि यह एहतियाती कदम है ताकि विवादित सामग्री आगे न फैले और विद्यार्थियों तक संशोधित संस्करण ही पहुंचे।
शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तैयार करते समय विशेषज्ञों की टीम काम करती है, लेकिन अगर किसी स्तर पर चूक हुई है तो उसे सुधारा जाएगा। फिलहाल आंतरिक जांच भी जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि विवादित सामग्री कैसे शामिल हुई।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि शिक्षा से जुड़े संस्थान समाज की बौद्धिक नींव तैयार करते हैं। ऐसे में उनसे उच्चतम स्तर की जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। कोर्ट ने संकेत दिया कि केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर यह किसी तरह की लापरवाही या जानबूझकर की गई कार्रवाई है, तो उसके पीछे की वजहों की पड़ताल जरूरी है। अदालत ने फिलहाल मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय करते हुए एनसीईआरटी से विस्तृत जवाब मांगा है।
शिक्षा जगत में चर्चा
इस पूरे NCERT Book Controversy ने शिक्षा जगत में भी बहस छेड़ दी है। कई शिक्षाविदों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होनी चाहिए। उनका कहना है कि कंटेंट तैयार करने से लेकर प्रकाशन तक कई स्तरों पर जांच की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विवादों के बावजूद एनसीईआरटी देश की प्रमुख शैक्षिक संस्था है और उसकी विश्वसनीयता को बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसलिए सुधारात्मक कदमों के साथ-साथ संवाद भी जरूरी है।
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आगे क्या?
अब नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत माफी को किस शर्त पर स्वीकार करती है या मामले में आगे क्या निर्देश देती है। दूसरी ओर, एनसीईआरटी प्रशासनिक स्तर पर किताबों की समीक्षा और संशोधन की प्रक्रिया तेज कर चुका है।
कुल मिलाकर, यह NCERT Book Controversy केवल एक किताब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता के बड़े सवालों को सामने ले आया है। आने वाले दिनों में इस विवाद का असर शैक्षणिक नीतियों और पाठ्यपुस्तक प्रकाशन प्रक्रिया पर भी देखने को मिल सकता है।
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