Kerala Assembly Election 2026: केरल की राजनीति में आज सबसे बड़ा दिन है। 9 अप्रैल को 140 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान हो रहा है। 2.71 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे और 883 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे।
इस Kerala Assembly Election 2026 में पुरुष मतदाताओं की संख्या 1.32 करोड़, महिला मतदाता 1.39 करोड़ और 273 ट्रांसजेंडर वोटर भी लोकतंत्र के इस पर्व में भाग ले रहे हैं। यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला है।
Kerala Assembly Election 2026: तीन गठबंधन, एक सत्ता – किसकी बनेगी सरकार?
इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है।
- एलडीएफ (वाम गठबंधन)
- यूडीएफ (कांग्रेस गठबंधन)
- एनडीए (बीजेपी गठबंधन)
पिनराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ सत्ता बचाने की कोशिश में है। वहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी यूडीएफ को मजबूत करने में जुटे हैं। दूसरी ओर नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने एनडीए के लिए जोरदार प्रचार किया।
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एलडीएफ – मजबूत कैडर, लेकिन एंटी-इन्कम्बेंसी का खतरा
एलडीएफ की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठन और ग्रामीण क्षेत्रों में पकड़ है। वामपंथी विचारधारा, मजदूर वर्ग और कुछ पिछड़े वर्गों में उसका आधार मजबूत है। लेकिन Kerala Assembly Election 2026 में उसके सामने सबसे बड़ा खतरा एंटी-इन्कम्बेंसी का है। गोल्ड स्मगलिंग केस और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विपक्ष लगातार हमला कर रहा है।
यूडीएफ – परंपरागत वोट बैंक, लेकिन अंदरूनी कलह
यूडीएफ का पारंपरिक वोट बैंक मुस्लिम और ईसाई समुदाय रहा है। इस वजह से कई सीटों पर उसकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, आंतरिक गुटबाजी उसके लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। विपक्षी हमलों के साथ-साथ पार्टी के अंदर की खींचतान Kerala Assembly Election 2026 में उसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
एनडीए – तीसरा विकल्प या गेम चेंजर?
बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए इस चुनाव में खुद को तीसरे विकल्प के तौर पर स्थापित करने में लगा है। सबरीमाला मुद्दे के बाद कुछ क्षेत्रों में बीजेपी का समर्थन बढ़ा है। पंचायत और लोकसभा चुनावों में बढ़ते वोट शेयर ने पार्टी के आत्मविश्वास को मजबूत किया है।
एनडीए ने CBI जांच कराने, दो साल के अंदर AIIMS अस्पताल स्थापित करने और विकास आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने का वादा किया है। इन्हीं वादों के चलते Kerala Assembly Election 2026 में एनडीए को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि पार्टी खुद को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
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Kerala Assembly Election 2026: चुनावी मुद्दे – धर्म, विकास और भ्रष्टाचार
इस चुनाव में कई बड़े मुद्दे छाए रहे, जिनमें गोल्ड स्मगलिंग केस, सबरीमाला विवाद, विकास और रोजगार, तथा वायनाड भूस्खलन प्रमुख रहे। इन सभी मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमाया रहा। एलडीएफ और यूडीएफ ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप लगाए, जिससे चुनावी मुकाबला और तीखा हो गया। वहीं बीजेपी ने दोनों ही गठबंधनों पर विकास न करने का आरोप लगाते हुए खुद को एक बेहतर विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश की।
Kerala Assembly Election 2026: किसने किस पर किया हमला?
सीपीआई(एम) ने वायनाड भूस्खलन को लेकर कांग्रेस को घेरा और राहत फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने एलडीएफ पर तानाशाही और पार्टी के अंदर फूट के आरोप लगाए। बीजेपी ने दोनों गठबंधनों को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके शासन में राज्य का विकास नहीं हुआ।
वोट बैंक का गणि – किसके पास कितनी ताकत?
- एलडीएफ: मजदूर, वामपंथी, पिछड़ा वर्ग
- यूडीएफ: मुस्लिम और ईसाई समुदाय
- एनडीए: हिंदू वोट बैंक पर फोकस
यह सामाजिक समीकरण ही Kerala Assembly Election 2026 की दिशा तय करेगा।
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Kerala Assembly Election 2026: वोटिंग की तैयारियां – सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राज्य में कुल 30,495 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं, जिनमें से 352 बूथ पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित होंगे, जबकि 37 बूथ दिव्यांग कर्मियों की जिम्मेदारी में रहेंगे। मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए लगभग 76,000 पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही मतगणना की तैयारी भी पूरी कर ली गई है और इसके लिए 140 स्ट्रॉन्ग रूम तैयार किए गए हैं।
क्या कहती है सियासी हवा?
अब तक केरल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सीधी टक्कर रही है। लेकिन इस बार एनडीए की बढ़ती मौजूदगी मुकाबले को और दिलचस्प बना रही है। Kerala Assembly Election 2026 सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि यह तय करेगा कि केरल में सत्ता का संतुलन किस दिशा में जाएगा।
Kerala Assembly Election 2026: नतीजे बदल सकते हैं राजनीति का भविष्य
यह चुनाव कई मायनों में खास है, जैसे तीन मजबूत गठबंधन, बड़े मुद्दे और हाई-वोल्टेज प्रचार। अब सबकी नजर 9 अप्रैल की वोटिंग और उसके बाद आने वाले नतीजों पर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एलडीएफ सत्ता बचा पाएगा, यूडीएफ वापसी करेगा या एनडीए कोई बड़ा उलटफेर करेगा।
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