India Stray Dog Issue: देश के कई बड़े शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़कों, कॉलोनियों और बाजारों में कुत्तों के झुंड आम दृश्य बन चुके हैं। कई जगहों पर कुत्तों के हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों को गंभीर चोटें आईं। नगर निगमों की व्यवस्थाएं अक्सर सवालों के घेरे में रहती हैं।
ऐसे में यह मुद्दा सिर्फ पशु संरक्षण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य का भी बन गया है। रेबीज जैसे खतरनाक संक्रमण का खतरा भी लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।
India Stray Dog Issue: पशु चिकित्सकों की भूमिका क्यों है अहम?
आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान केवल पकड़ने या हटाने से नहीं हो सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि ABC (Animal Birth Control) प्रोग्राम, टीकाकरण और नसबंदी ही स्थायी समाधान हैं। यहीं पर पशु चिकित्सकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
- नसबंदी अभियान को वैज्ञानिक तरीके से चलाना
- रेबीज टीकाकरण सुनिश्चित करना
- घायल या बीमार जानवरों का उपचार
- जागरूकता अभियान चलाना
इन सब कार्यों के लिए प्रशिक्षित वेटरनरी डॉक्टरों की आवश्यकता होती है। लेकिन देश में पशु चिकित्सकों की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।
India Stray Dog Issue: वेटरनरी काउंसिल की मांग क्या है?
वेटरनरी काउंसिल लंबे समय से सरकार से मांग कर रही है कि –
- पशु चिकित्सकों की भर्ती बढ़ाई जाए
- नगर निगम स्तर पर स्थायी वेटरनरी स्टाफ नियुक्त हो
- नसबंदी और टीकाकरण के लिए अलग बजट आवंटित हो
- वेटरनरी शिक्षा और प्रशिक्षण को मजबूत किया जाए
काउंसिल का कहना है कि यदि विशेषज्ञों को पर्याप्त संसाधन और अधिकार दिए जाएं, तो आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
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India Stray Dog Issue: मोहन भागवत का बयान क्यों चर्चा में?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान संतुलन और संवेदनशीलता से निकालना होगा।
उनका जोर इस बात पर था कि समाज को पशुओं के प्रति दया भाव रखना चाहिए, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा भी सर्वोपरि है। स्थानीय प्रशासन, समाज और पशु चिकित्सकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि केवल भावनात्मक बहस से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि वैज्ञानिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना होगा।
India Stray Dog Issue: पशु प्रेम बनाम जन सुरक्षा – कैसे बने संतुलन?
यह मुद्दा अक्सर दो ध्रुवों में बंट जाता है, एक तरफ पशु प्रेमी संगठन, जो कुत्तों को हटाने के विरोध में खड़े होते हैं। दूसरी तरफ वे नागरिक, जो सुरक्षा की मांग करते हैं। मोहन भागवत के बयान ने इसी संतुलन की ओर इशारा किया। उन्होंने सुझाव दिया कि –
- सामुदायिक सहभागिता बढ़ाई जाए
- कॉलोनी स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलें
- पशु चिकित्सकों की सलाह से नीति बनाई जाए
India Stray Dog Issue: आंकड़े क्या कहते हैं?
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में आवारा कुत्तों की संख्या करोड़ों में है। हर साल हजारों लोग डॉग बाइट के शिकार होते हैं। WHO के आंकड़े बताते हैं कि रेबीज से होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा काफी अधिक है। यह स्थिति बताती है कि समस्या को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।
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India Stray Dog Issue: सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी
स्थानीय निकायों को चाहिए कि –
- नियमित नसबंदी अभियान चलाएं
- टीकाकरण रिकॉर्ड डिजिटल करें
- शिकायतों के लिए हेल्पलाइन सक्रिय करें
- वेटरनरी अस्पतालों की संख्या बढ़ाएं
यदि नीति और क्रियान्वयन के बीच तालमेल बने, तो स्थिति में सुधार संभव है।
India Stray Dog Issue: समाज की भूमिका भी जरूरी
केवल सरकार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं।
- पालतू कुत्तों को सड़क पर न छोड़ें
- कचरा प्रबंधन सही रखें, जिससे कुत्तों को भोजन स्रोत कम मिले
- बच्चों को जानवरों के प्रति व्यवहार सिखाएं
सामूहिक जिम्मेदारी ही दीर्घकालिक समाधान दे सकती है।
India Stray Dog Issue: क्या आगे बदलेगी तस्वीर?
मोहन भागवत के बयान के बाद यह मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है। वेटरनरी काउंसिल की मांगों पर सरकार क्या कदम उठाएगी, यह आने वाला समय बताएगा।
लेकिन इतना तय है कि आवारा कुत्तों की समस्या को न तो केवल भावना से और न ही केवल कठोरता से सुलझाया जा सकता है। वैज्ञानिक नीति, प्रशिक्षित पशु चिकित्सक और समाज की भागीदारी यही समाधान की कुंजी है।
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