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Gaganyaan Mission भारत की अंतरिक्ष में ऐतिहासिक छलांग

Gaganyaan Mission

गुरुवार यानी आज के दिन इंडियन एस्ट्रोनॉट के शुभांशु शुक्ला करीब दोपहर 1 बजे दिल्ली में गगनयान मिशन के बारे में बताएंगे। उनके साथ में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहेंगे।

आपको बता दें कि शुभांशु शुक्ला ने एक्सियोम-4 मिशन तहत 20 दिन अंतरिक्ष में गुजारे थे। 18 दिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए थे। वही 26 जून को ISS पर पहुंचने के बाद 15 जुलाई को पृथ्वी पर वापस लौटे हैं।

कैसी है गगनयान मिशन की तैयारी?

बताया जा रहा है कि गगनयान मिशन के तहत 2027 में स्पेसक्राफ्ट से वायुसेना के तीन पायलट्स को स्पेस में भेजा जाएगा। यह ISRO का ह्यूमन स्पेस मिशन होगा। ये पायलट 400 किमी के ऑर्बिट पर पूरे 3 दिन तक रहेंगे, जिसके बाद हिंद महासागर में लैंडिंग कराई जाएगी। इस मिशन की लागत करीब 20,193 करोड़ रुपए है।

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कब से शुरु होगा मिशन गगनयान?

इस मिशन के जरिए पायलट्स को स्पेस में भेजने से पहले इसरो दो खाली टेस्ट फ्लाइट भेजेगा। इनके बाद तीसरी फ्लाइट में रोबोट को भेजा जाएगा। इन सभी टेस्ट की सफलता के बाद चौथी फ्लाइट में इंसान स्पेस पर जा सकेंगे। अनुमान है कि पहली टेस्ट फ्लाइट इस साल के अंत तक भेजी जा सकती है।

गगनयान मिशन से भारत को क्या हासिल होगा

गगनयान मिशन से भारत को कई तरह के फायदे होगे। स्पेस एक बढ़ती हुई इकोनॉमी है, जो 2035 तक 1.8 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 154 लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी। इसलिए भारत का इसमें बना रहना काफी जरूरी है। इस मिशन से रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत स्पेस में इंसान भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा।

इस मिशन की सफलता से निवेश बढ़ेगा जिससे इकोनॉमी को काफी हद तक फायदा होगा। साथ ही स्पेस इंडस्ट्री में काम कर रहे दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने का मौका भी मिलेगा।

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