BRICS 2026: भारत की अध्यक्षता में BRICS 2026 की तैयारियों ने औपचारिक रूप से रफ्तार पकड़ ली है। 9 और 10 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में BRICS 2026 शेरपा और सूस शेरपा की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस BRICS 2026 बैठक को भारत की आगामी अध्यक्षता के लिए दिशा तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है। दो दिवसीय विचार-विमर्श में वैश्विक चुनौतियों, विकास सहयोग और संस्थागत सुदृढ़ीकरण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारत ने रखी अपनी थीम- रेजिलिएंस, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी पर जोर
बैठक की अध्यक्षता भारत के BRICS शेरपा और आर्थिक संबंधों के सचिव सुधाकर दलेला ने की। उनके साथ संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय आर्थिक संबंध) शंभु एल. हक्की, जो भारत के सूस शेरपा हैं, भी मौजूद रहे। भारत ने अपनी BRICS 2026 की अध्यक्षता के लिए ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ थीम प्रस्तुत की। इस थीम के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि वह BRICS 2026 को एक अधिक व्यावहारिक, जन-केंद्रित और भविष्य उन्मुख मंच के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है।
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भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपनी प्राथमिकताओं को भी साझा किया। इनमें स्वास्थ्य, कृषि, श्रम और रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, डिजास्टर रिस्क रिडक्शन, सूचना प्रौद्योगिकी, नवाचार, आर्थिक और वित्तीय स्थिरता, तथा आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे विषय शामिल रहे। सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों ने इन क्षेत्रों में प्रस्तावित गतिविधियों और कार्यक्रमों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी
इस बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा नए सदस्य देशों- मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात—के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। सभी देशों के शेरपाओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत की अध्यक्षता के विज़न की सराहना की और इसे पिछले वर्षों में शुरू की गई सहयोगात्मक पहलों का स्वाभाविक विस्तार बताया।
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10 फरवरी को BRICS 2026 प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। इस दौरान वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाने, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक ने यह संकेत दिया कि BRICS अब केवल आर्थिक मंच नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक सहयोग का प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है।
संस्थागत विकास और जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर चर्चा
दो दिवसीय सत्रों में BRICS 2026 के संस्थागत ढांचे को और मजबूत बनाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। भारत ने अपने ‘पीपल-सेंट्रिक’ यानी लोगों पर केंद्रित दृष्टिकोण के तहत कई नए आयामों को सामने रखा। खेल सहयोग, युवा संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, अकादमिक मंच, थिंक टैंक परिषद, सिविल फोरम, बिजनेस काउंसिल और विमेंस बिजनेस अलायंस जैसे मंचों को अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया गया।
प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि BRICS 2026 के भीतर केवल सरकार-स्तरीय संवाद ही नहीं, बल्कि समाज, उद्योग, शिक्षा और नागरिक संगठनों के बीच भी संपर्क बढ़ाया जाना चाहिए। इससे सदस्य देशों के बीच पारस्परिक समझ और दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूती मिलेगी।
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वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर साझा दृष्टिकोण
BRICS 2026 बैठक में लचीलापन (रेजिलिएंस), नवाचार, सहयोग और सतत विकास जैसे चार प्रमुख स्तंभों को आगे बढ़ाने के लिए सदस्य देशों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी आधारित समाधानों को भी सहयोग का अहम क्षेत्र बताया गया।
भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी अध्यक्षता का उद्देश्य BRICS 2026 को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना है, ताकि यह मंच वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को मजबूती से आगे बढ़ा सके। सदस्य देशों ने इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए आने वाले महीनों में नियमित समन्वय बैठकों पर सहमति जताई।
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सांस्कृतिक कार्यक्रम और आगे की रूपरेखा
बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय और हस्तकला अकादमी का दौरा किया। इसके अलावा अक्षरधाम मंदिर भी गए, जहां भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की गई। इन दौरों का उद्देश्य BRICS 2026 देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को और गहरा करना था।
आने वाले महीनों में शेरपा और सूस शेरपा स्तर की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि विभिन्न विषयगत ट्रैकों पर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके। माना जा रहा है कि भारत की अध्यक्षता में BRICS 2026 शिखर सम्मेलन वैश्विक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण संदेश देगा—कि विकास, सहयोग और स्थिरता के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाएं मिलकर निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
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