BMC Result: मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र की सियासत में जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। 25 साल बाद ठाकरे परिवार का बीएमसी पर कब्जा खत्म हो चुका है और भाजपा नीत महायुति को ऐतिहासिक बहुमत मिला है। लेकिन सत्ता का असली खेल अब मेयर पद को लेकर शुरू हो गया है, जहां उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
चुनाव में हार के बावजूद उद्धव ठाकरे खुद को ‘किंगमेकर’ बताकर मुंबई का मेयर बनाने का दावा कर रहे थे। मगर अब जो खबरें सामने आ रही हैं, उन्होंने ठाकरे खेमे में खलबली मचा दी है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के कई पार्षद अचानक नॉट रीचेबल हो गए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में साजिश और टूट की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
BMC Result- 25 साल बाद टूटा ठाकरे किला
मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन पर पिछले ढाई दशक से शिवसेना का दबदबा रहा है। इस बार चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं, लेकिन स्पष्ट बहुमत के बावजूद मेयर बनाने के लिए उसे शिवसेना (शिंदे गुट) के समर्थन की जरूरत है। यही वजह है कि शिंदे गुट अचानक सत्ता की चाबी बनकर उभरा है।
उद्धव ठाकरे- ‘भगवान चाहेंगे तो हमारा मेयर बनेगा’
चुनाव परिणाम आने के बाद उद्धव ठाकरे लगातार संकेत दे रहे थे कि बीएमसी में मेयर उनकी पार्टी का ही होगा। उनका मानना था कि महायुति के भीतर समीकरण बदल सकते हैं और वे निर्णायक भूमिका निभाएंगे। लेकिन हालात अब उनके नियंत्रण से बाहर जाते दिख रहे हैं।
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BMC Result-ठाकरे गुट के पार्षद नॉट रीचेबल
सूत्रों का दावा है कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ चुने हुए पार्षद सत्ता का स्वाद चखने के लिए पाला बदल सकते हैं। बताया जा रहा है कि ये पार्षद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और इसी वजह से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस खबर ने राजनीतिक हलकों में सनसनी फैला दी है।

ताज होटल में ‘लॉक’ शिंदे गुट के पार्षद
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (शिंदे गुट) ने अपने सभी पार्षदों को बांद्रा स्थित ताज लैंड्स होटल में ठहराया है। साथ ही दूसरी पार्टियों के पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए ‘ऑपरेशन टाइगर’ शुरू कर दिया गया है। यही वजह मानी जा रही है कि ठाकरे गुट के कुछ पार्षद अचानक गायब हो गए हैं।
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BMC Result- भाजपा को ज्यादा सीटें
बीएमसी चुनाव में भले ही भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन शिंदे गुट के बिना सत्ता में आना उसके लिए मुश्किल है। ऐसे में शिवसेना (शिंदे) की bargaining power काफी बढ़ गई है और मेयर पद को लेकर दबाव की राजनीति तेज हो गई है। शिवसेना कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह साल बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी का है। ऐसे में उन्हें श्रद्धांजलि देने का सबसे बड़ा तरीका यही होगा कि मुंबई नगर निगम में एक बार फिर शिवसेना का मेयर बने। इस भावना को पार्टी नेताओं ने एकनाथ शिंदे तक भी पहुंचाया है।
बालासाहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि या सत्ता का सौदा?
सूत्रों का कहना है कि भाजपा को ज्यादा सीटें मिलने के बावजूद शिवसेना कार्यकर्ता मेयर पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत भारी पड़ती है या सत्ता का गणित मुंबई की सियासत की नई तस्वीर खींचता है।



