बीजेपी वो पार्टी हैं जो सियासी मैदान में उतरते वक्त हमेशा बहुत सावधान रहती हैं। फिर बात चाहे चुनावी रणनीति की हो या समीकरण सांधने की। जगदीप धनखड़ के उप-राष्ट्रपति पद को त्यागते ही सियासी गलियारों में अफवाहों का मैदान गर्म हो गया था।
जिसमें किसी को शायद ही यह अंदाजा होगा कि बीजेपी के पिटारे से इस बार सी पी राधाकृष्णन बाहर आएंगी। वैसे तो बीजेपी इसके लिए मशहूर हैं कि वो पार्टी अकसर ऐसे नामों को लेकर आती हैं जिसका किसी को कोई अंदाजा नहीं होता।
क्यों चुना राधाकृष्णन को ?
अगर बात एनडीए के उम्मीदवार के बारे में की जानी है तो सबसे पहले यह समझना होगा कि आखिर बीजेपी को इस नए चेहरे की जरुरत क्या थी ?
दक्षिण से जुड़ना – सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडू से आते हैं। ऐसे में उनका चुनाव बीजेपी को दक्षिण के राज्यों में मजबूती देने का काम करेगा।
संघ की पसंद – बीजेपी ने इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद का भी ख्याल रखा है। संघ से आने वाले राधाकृष्णन वैचारिक रुप से बीजेपी और संघ को बहुत मानते हैं। ऐसे में बीजेपी अपने हिंदुत्वादी चेहरों को जगह देने की कोशिश कर रही हैं।
लंबे सफर को सलाम- उन्होंने एक कार्यकर्ता के रुप में बीजेपी का दामन थामा था। ऐसे में बीजेपी में कई पदों पर रहने के बाद उन्हें यह पद मिलना दूसरे कार्यकर्ताओं को संदेश देता हैं कि बीजेपी कभी अपने कार्यकर्ताओं को नहीं भूलती।

कौन हैं सी पी राधाकृष्णन ?
सीपी राधाकृष्णन का पूरा नाम चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन हैं। वह वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। वह लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 1998 और 1999 में तमिलनाडु के कोयंबटूर से लोकसभा के चुनावों में जीत हासिल की। इसके बाद 2004, 2014 और 2019 में लगातार तीन बार इसी सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया। इसके बाद जुलाई 2024 में वह महाराष्ट्र के राज्यपाल बने और अब उन्हें एनडीए ने उप-राष्ट्रपति पद के लिए दावेदार बनाया हैं।
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