Muzaffarnagar News : ओवैसी की ऐंट्री से गरम हुआ सियासी तापमान
मुजफ्फरनगर के ‘पंडित जी वैष्णो ढाबा’ विवाद ने स्थानीय स्तर से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल मचा दी है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों के मालिकों की धार्मिक पहचान की जबरन जांच, उस पर हुई मारपीट की एफआईआर, और इसे लेकर नेताओं के तीखे बयान – इन सबने मामले को और गर्मा दिया है। पुलिस ने ढाबा संचालक सनव्वर, उसके बेटे आदिल, जुबैर और दो अन्य के खिलाफ पूर्व मैनेजर धर्मेंद्र की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। धर्मेंद्र ने आरोप लगाया कि उसे सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने ढाबे के ‘हिंदू’ नाम के पीछे इसके मुस्लिम संचालक की पहचान उजागर कर दी थी। वहीं इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने और स्वामी यशवीर महाराज की टीम की भूमिका की भी जांच चल रही है। इस घटना ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर धार्मिक पहचान के आधार पर दुकानदारों से पूछताछ और उनकी व्यक्तिगत पहचान उजागर करने की बहस को भी नया रंग दे दिया है।
Muzaffarnagar News : जानें क्या हैं पूरा मामला ?
मामले की शुरुआत तब हुई जब स्वामी यशवीर महाराज की टीम ने मुजफ्फरनगर के कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले ढाबों और होटलों के मालिकों की धार्मिक पहचान जांचने का अभियान छेड़ दिया। जिला प्रशासन की अनुमति के बिना यह टीम दुकानदारों से उनका नाम और धर्म पूछ रही थी। स्थानीय पुलिस के अनुसार, इन लोगों ने कई ढाबों पर जाकर पहचान पत्र देखने की मांग की और कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों के साथ जबरदस्ती भी की। ‘पंडित जी वैष्णो ढाबा’ के एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि स्वामी यशवीर की टीम ने पहचान के नाम पर उनका पेंट उतारने तक की कोशिश की। हालांकि, स्वामी यशवीर महाराज ने इस आरोप को सिरे से नकारते हुए कहा कि यह तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए की गई सावधानी थी। पुलिस ने इस मामले में स्वामी यशवीर की टीम के छह सदस्यों – सुमित बहरागी, रोहित, विवेक, सुमित, सनी और राकेश – को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर थाने में उपस्थित होने का आदेश दिया है। न्यू मंडी थाना प्रभारी दिनेश चंद भागल ने बताया कि वीडियो में दिखने वाले अन्य लोगों को भी नोटिस भेजे जा सकते हैं। प्रशासन ने कहा है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
इस बीच मामले ने जबरदस्त राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी नेताओं ने इसे धार्मिक भेदभाव और डर फैलाने की साजिश बताया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कांवड़ यात्रा पहले भी शांतिपूर्वक निकलती थी, लेकिन अब अचानक होटल मालिकों से आधार कार्ड मांगा जा रहा है और दुकानदारों से पैंट उतारने को कहा जा रहा है। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुकानदारों को परेशान करने वालों को गिरफ्तार करने की बजाय प्रशासन खुद तमाशा बना रहा है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ओवैसी ने पूछा कि कोई कैसे किसी होटल में घुसकर मालिक से उसका धर्म पूछ सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने एसपी नेता एसटी हसन के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर कोई हिंदू नाम रखकर दुकान चला रहा है, तो यह ग्राहकों को धोखा देना है और ऐसे में सवाल पूछना गलत कैसे हो सकता है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने भी कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों और ढाबों को अपने मालिक और प्रबंधक का नाम-पता तथा खाद्य लाइसेंस सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का आदेश दिया है। हालांकि विपक्ष ने इसे एकतरफा कार्रवाई और धार्मिक ध्रुवीकरण की साजिश करार दिया है। पुलिस और प्रशासन के लिए यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक पहचान, पारदर्शिता, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन तलाशने की चुनौती बन गया है।
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