Jabalpur Overbridge Collapse: मध्य प्रदेश के जबलपुर में NH-45 पर बने रेलवे ओवरब्रिज का एक हिस्सा अचानक गिर गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। यह ओवरब्रिज शहर की लाइफलाइन माना जाता है, जिससे रोजाना हजारों गाड़ियां गुजरती हैं। जैसे ही ब्रिज गिरा, मौके पर अफरा-तफरी मच गई। अच्छी बात यह रही कि जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह ओवरब्रिज मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) की देखरेख में बनाया गया था। घटना के बाद, MPRDC ने तुरंत जांच शुरू की और कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
Jabalpur Overbridge Collapse: FIR दर्ज – किसे टारगेट किया गया?
घटना के बाद, एडमिनिस्ट्रेशन ने तुरंत एक्शन लिया और कंस्ट्रक्शन कंपनी मेसर्स बागड़ इंफ्रा के सिग्नेचर अथॉरिटी और टीम लीडर के खिलाफ FIR दर्ज की। FIR काम में लापरवाही और सरकारी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दर्ज की गई।
पुलिस ने MPRDC की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में कंस्ट्रक्शन के काम में गंभीर कमियां सामने आई हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक टेक्निकल गलती थी या घटिया मटीरियल का इस्तेमाल किया गया था?
Jabalpur Overbridge Collapse: कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी पर उठे सवाल
पुल का हिस्सा गिरना कोई आम बात नहीं है, खासकर जब वह नेशनल हाईवे NH-45 पर बना हो। इस हादसे ने हमें यह सवाल करने पर मजबूर कर दिया है कि क्या कंस्ट्रक्शन के स्टैंडर्ड्स का पालन किया गया था।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कंक्रीट की क्वालिटी, स्टील की मजबूती और स्ट्रक्चरल डिज़ाइन सही होता, तो स्ट्रक्चर इतनी जल्दी कमजोर नहीं होता। क्या पुल का समय से पहले गिरना लापरवाही साबित करता है?
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कंस्ट्रक्शन के दौरान क्वालिटी को लेकर कई शिकायतें की गईं, लेकिन उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया।
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Jabalpur Overbridge Collapse: प्रशासन का सख्त रुख
जबलपुर प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। एक जांच टीम साइट पर भेजी गई है और टेक्निकल ऑडिट किया जा रहा है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में घटिया मटीरियल या जानबूझकर लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, यहां तक कि ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
Jabalpur Overbridge Collapse: लोगों में गुस्सा और डर
इस घटना के बाद लोगों में डर का माहौल है। जो ओवरब्रिज कभी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था, अब खतरे की निशानी बन गया है। लोग पूछ रहे हैं कि, क्या उनकी जान इतनी सस्ती है? क्या सरकारी प्रोजेक्ट्स में क्वालिटी से समझौता करना आम बात हो गई है?
सोशल मीडिया पर #JabalpurOverbridgeCollapse भी ट्रेंड करने लगा है। लोग साफ जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
Jabalpur Overbridge Collapse: NH-45 और जबलपुर के ट्रैफिक सिस्टम पर असर
NH-45 जबलपुर को कई जरूरी शहरों से जोड़ता है। इस ओवरब्रिज के डैमेज होने से ट्रैफिक डायवर्जन हुआ है, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है और आने-जाने वालों को परेशानी हो रही है।
ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक पूरा स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं हो जाता, तब तक दूसरे हिस्सों की भी अच्छी तरह जांच होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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Jabalpur Overbridge Collapse: अगला कदम क्या होगा?
- टेक्निकल जांच रिपोर्ट का इंतजार
- कंस्ट्रक्शन कंपनी से पूछताछ
- जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच
- ब्लैकलिस्टिंग की संभावना
- भविष्य में क्वालिटी की और कड़ी मॉनिटरिंग
यह मामला सिर्फ एक पुल के गिरने का नहीं है, बल्कि पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम के भरोसे का है।
Jabalpur Overbridge Collapse: बड़ा सवाल – जवाबदेही कौन तय करेगा?
हर बार जब कोई एक्सीडेंट होता है, तो FIR दर्ज की जाती है और जांच शुरू की जाती है, लेकिन क्या इससे सिस्टम बेहतर होता है? जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, तब तक ऐसे एक्सीडेंट को रोकना मुश्किल होगा।
जबलपुर ओवरब्रिज एक्सीडेंट एक चेतावनी है कि डेवलपमेंट के चक्कर में क्वालिटी और सेफ्टी से समझौता नहीं किया जा सकता।
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