Indore-Pithampur Economic Corridor: मध्य प्रदेश में 3 मई का दिन विकास की दृष्टि से एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया। राज्य सरकार ने जिस बड़े विजन के साथ इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर की शुरुआत की है, वह आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार ढांचे को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के नैनोद गांव में 2360 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस मेगा प्रोजेक्ट (Indore-Pithampur Economic Corridor) के पहले चरण का भूमिपूजन किया। यह सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार और किसान समृद्धि का नया मॉडल माना जा रहा है।
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किसानों की भागीदारी से बदला विकास का मॉडल
इस परियोजना (Indore-Pithampur Economic Corridor) की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें किसानों को सिर्फ प्रभावित पक्ष नहीं बल्कि विकास का साझेदार बनाया गया है। कार्यक्रम में किसानों ने सरकार के प्रति विश्वास जताते हुए जमीन देने की सहमति दी और मुख्यमंत्री का स्वागत हल और मुकुट भेंट कर किया। सरकार ने किसानों को उनकी भूमि के बदले चार गुना मुआवजा देने के साथ एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा वापस देने का निर्णय लिया है। इस फैसले से कई किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और कुछ किसान सीधे तौर पर करोड़पति श्रेणी में पहुंच गए हैं।
इकोनॉमिक कॉरिडोर से उद्योग और रोजगार को मिलेगी रफ्तार
इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर (Indore-Pithampur Economic Corridor) को प्रदेश के औद्योगिक भविष्य की रीढ़ माना जा रहा है। लगभग 20.28 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का विकास सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक किया जा रहा है। 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास के साथ यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि औद्योगिक विस्तार को भी नई दिशा देगी। इस कॉरिडोर के माध्यम से एग्री प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही हजारों नए रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
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इंदौर से उज्जैन तक बन रहा नया मेट्रोपॉलिटन क्लस्टर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर कहा कि इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुर और रतलाम को मिलाकर एक नया मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित हो रहा है। यह कॉरिडोर सिर्फ इंदौर-पीथमपुर तक सीमित नहीं बल्कि एक बड़े औद्योगिक नेटवर्क का हिस्सा है, जो दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से भी जुड़ रहा है। इससे क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार और परिवहन को भी नई गति मिलेगी। 75 मीटर चौड़ी सड़क और बफर जोन इस परियोजना को भविष्य के लिए और अधिक मजबूत बनाते हैं।
किसान, युवा और उद्योग – विकास का नया त्रिकोण
इस परियोजना को सरकार ने किसान, युवा और उद्योग के त्रिकोण पर आधारित विकास मॉडल बताया है। सरकार का दावा है कि इससे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। किसानों को न केवल भूमि का उचित मूल्य मिला है बल्कि उन्हें विकास में हिस्सेदारी भी दी गई है। सरकार का कहना है कि यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर किसानों को 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस दी जा रही है।
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निवेश और औद्योगिक विस्तार का नया केंद्र बनेगा MP
कार्यक्रम में बताया गया कि मध्य प्रदेश में अब तक 48 औद्योगिक पार्क स्थापित किए जा चुके हैं और करीब 9 लाख करोड़ रुपये का निवेश राज्य में लाया गया है। इससे प्रदेश देश में तेजी से उभरते औद्योगिक राज्यों में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर वर्ग किसान, महिला, युवा और गरीब को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसी दिशा में इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर (Indore-Pithampur Economic Corridor) एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
भविष्य की तस्वीर – आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय
सरकार का दावा है कि यह परियोजना (Indore-Pithampur Economic Corridor) केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का एक बड़ा अध्याय है। इससे न केवल प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि होगी बल्कि लाखों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। मध्य प्रदेश अब उस दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां विकास केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि गांवों और किसानों तक भी पहुंचेगा। इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर इसी बदलाव की सबसे मजबूत मिसाल बनकर उभर रहा है।
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