Eiffel Tower Road Controversy: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। वजह है शहर के एक व्यस्त चौराहे के बीचों-बीच खड़ा किया गया एक ऐसा स्ट्रक्चर, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और परेशान भी। यह संरचना किसी पार्क, गार्डन या टूरिस्ट जोन में नहीं, बल्कि सीधे सड़क के बीच खड़ी है और इसकी डिजाइन पेरिस के मशहूर एफिल टावर से प्रेरित बताई जा रही है।
सोशल मीडिया पर लोग मजाक में पूछ रहे हैं कि, ‘भोपाल को पेरिस बनाने की तैयारी है क्या?’
Eiffel Tower Road Controversy: सड़क के बीच एफिल टावर – किसका आइडिया था?
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह संरचना नगर निगम के सिटी ब्यूटीफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई है। मकसद था शहर को एक नई पहचान देना और ‘आकर्षक’ बनाना।
लेकिन सवाल यह उठता है कि –
- क्या खूबसूरती के नाम पर ट्रैफिक को जोखिम में डालना सही है?
- क्या शहर की पहचान केवल कॉपी-पेस्ट आइडियाज से बनेगी?
शहरवासियों का कहना है कि अगर यही स्ट्रक्चर किसी चौक के किनारे, गार्डन या ओपन स्पेस में बनाया जाता, तो शायद इतनी नाराज़गी नहीं होती।
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Eiffel Tower Road Controversy: 90 डिग्री पुल की यादें फिर ताजा
भोपाल इससे पहले भी 90 डिग्री मोड़ वाले फ्लाईओवर को लेकर देशभर में चर्चा में रहा है। उस पुल को लेकर इंजीनियरिंग, डिजाइन और सुरक्षा पर सवाल उठे थे। अब सड़क के बीच एफिल टावर जैसी संरचना ने लोगों को वही पुरानी यादें ताजा कर दी हैं।
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, ‘पहले ड्राइविंग स्किल टेस्ट था, अब टूरिस्ट स्पॉट बना दिया!’
Eiffel Tower Road Controversy: ट्रैफिक बनाम टूरिज्म – असली मुद्दा क्या है?
प्रशासन इसे शहर की ब्रांडिंग और टूरिज्म से जोड़कर देख रहा है, लेकिन आम जनता की चिंताएं बिल्कुल अलग हैं। मुख्य सवाल जो लोग उठा रहे हैं –
- क्या इससे ट्रैफिक बाधित होगा?
- क्या रात में एक्सीडेंट का खतरा बढ़ेगा?
- क्या एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाओं पर असर पड़ेगा?
ट्रैफिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सड़क के बीच स्थायी संरचना बनाना ट्रैफिक इंजीनियरिंग के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है।
Eiffel Tower Road Controversy: सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़
जैसे ही ‘भोपाल का एफिल टावर’ सामने आया, सोशल मीडिया मीम्स से भर गया। कोई भोपाल को ‘Mini Paris of India बता रहा है, तो कोई कह रहा है, ‘अब भोपाल में वीजा नहीं, हेलमेट जरूरी है।’
ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर यह मुद्दा ट्रेंड करने लगा, जिससे साफ है कि मामला सिर्फ स्थानीय नहीं रहा।
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Eiffel Tower Road Controversy: प्रशासन का पक्ष क्या है?
नगर निगम और प्रशासन का कहना है कि –
- संरचना सभी ट्रैफिक नियमों को ध्यान में रखकर बनाई गई है
- इसका उद्देश्य शहर की पहचान को नया रूप देना है
- भविष्य में जरूरत पड़ी तो बदलाव पर विचार किया जा सकता है
हालांकि अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि क्या इसे हटाया जाएगा या किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।
Eiffel Tower Road Controversy: शहरी विकास या बिना सोचे-समझे प्रयोग?
यह मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है कि, क्या भारत के शहर अब विकास से ज्यादा वायरल होने की दौड़ में हैं? शहरवासियों की मांग है कि –
- सुंदरता के साथ सुरक्षा भी प्राथमिकता हो
- फैसले लेते वक्त स्थानीय जरूरतों को समझा जाए
- पब्लिक फीडबैक को गंभीरता से लिया जाए
Eiffel Tower Road Controversy: आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि –
- क्या प्रशासन जनता की नाराजगी को गंभीरता से लेगा?
- क्या ‘भोपाल का एफिल टावर’ यहीं रहेगा या बदलेगा ठिकाना?
फिलहाल इतना तय है कि भोपाल एक बार फिर देशभर की सुर्खियों में है और इस बार वजह है सड़क के बीच खड़ा एक ‘एफिल टावर’।
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