Standing Drinking Water Side Effect: पानी जीवन का आधार है। शरीर को स्वस्थ, एक्टिव और डिटॉक्स रखने में पानी की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। लेकिन अगर पानी पीने का तरीका गलत हो, तो यही अमृत समान पानी बीमारी की वजह भी बन सकता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर खड़े-खड़े पानी पी (Standing Drinking Water) लेते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह आदत लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक चिकित्सा तक, बैठकर पानी पीने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं कि खड़े होकर पानी पीने से कौन-सी समस्याएं हो सकती हैं और सही तरीका क्या है।
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Standing Drinking Water: किडनी पर पड़ता है सीधा असर
जब आप खड़े होकर पानी (Standing Drinking Water) पीते हैं, तो पानी तेजी से शरीर में प्रवेश करता है और बिना फिल्ट्रेशन के निचले हिस्से में पहुंच जाता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा करने से किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कमजोर हो सकती है और यूरिन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, बैठकर पानी पीने से शरीर पानी को धीरे-धीरे अवशोषित करता है, जिससे किडनी को आराम मिलता है।

पाचन तंत्र हो सकता है कमजोर
खड़े होकर पानी पीने से पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है। पानी सीधे पेट में गिरता है, जिससे डाइजेस्टिव जूस सही तरीके से एक्टिव नहीं हो पाते। इसका नतीजा गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और अपच के रूप में सामने आ सकता है। बैठकर पानी पीने से पैरासिम्पैथेटिक नर्व सिस्टम एक्टिव होता है, जो पाचन को बेहतर बनाता है।
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जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की आशंका
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, खड़े होकर पानी पीने से शरीर में टॉक्सिन्स ठीक से बाहर नहीं निकल पाते। इससे जोड़ों में सूजन, घुटनों का दर्द और रीढ़ की हड्डी में जकड़न की समस्या हो सकती है। खासतौर पर बुजुर्गों और गठिया से पीड़ित लोगों के लिए यह आदत और भी नुकसानदायक हो सकती है।
फेफड़ों और दिल की सेहत पर असर
खड़े होकर पानी पीने (Standing Drinking Water) से शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता। इससे हार्ट और लंग्स तक जरूरी मिनरल्स और ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी और थकान भी महसूस हो सकती है।
Standing Drinking Water: आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद में बैठकर पानी पीने को अमृत समान बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार, बैठकर पानी पीने से अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) संतुलित रहती है और शरीर में ऊर्जा का संचार बेहतर होता है। वहीं खड़े होकर पानी पीना वात दोष को बढ़ा सकता है, जिससे जोड़ों और नसों की समस्या हो सकती है।
पानी पीने का सही तरीका क्या है?
- हमेशा शांत मन से बैठकर पानी पिएं
- पीठ सीधी रखें और छोटे-छोटे घूंट लें
- बहुत ठंडा पानी पीने से बचें
- सुबह खाली पेट बैठकर पानी पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है
- दिनभर में 7–8 गिलास या जरूरत के अनुसार पानी जरूर पिएं
कब रखें खास सावधानी?
अगर आपको किडनी, पेट, हार्ट या जोड़ों से जुड़ी कोई समस्या है, तो पानी पीने के तरीके पर खास ध्यान देना चाहिए। सही आदत अपनाकर आप कई बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।
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