Diwali 2025: दिवाली, भारत का सबसे खास और लोकप्रिय त्योहार है. यह अंधकार पर रोशनी, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है. भारत ही नहीं विदेशों में बसे सभी भारतीयों के लिए भी ये एक भव्य त्यौहार है, इस पर्व को बड़े ही उमंग, उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. जब 14 वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटे थे, तो उनके स्वागत में नगरवासियों ने घर-घर दीये जलाए थे और अयोध्या को दीपों की रोशनी से सजा दिया था. उस दिन से दिवाली को “दीयों का त्योहार” भी कहा जाने लगा.
दिवाली शब्द का निर्माण ‘दीपावली’ संस्कृत के शब्द ‘दीप’ (दीया) और ‘आवली’ (पंक्ति) से हुआ है, जिसका अर्थ होता है “दीयों की पंक्ति”. यह त्योहार न सिर्फ 1 दिन, बल्कि 5 दिनों का होता है और इसकी शुरुआत धनतेरस से शुरू हो जाती है वहीं इसका समापन पांचवे दिन भाई दूज के साथ होता है. यह 5 दिन अपने आप में बहुत ही खास होते हैं क्यूंकि हर दिन का अपना महत्व होता है.
दिवाली कब है? (Diwali 2025)
दिवाली का त्यौहार हर वर्ष कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार यानि 2025 में कार्तिक अमावस्या 20 अक्टूबर (सोमवार) को है. वहीं लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त 20 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 21 अक्टूबर की शाम 05 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगा.

दिवाली में क्या है पूजा का नियम?
गृहस्थ लोग दिवाली पर प्रदोष काल में स्थिर लग्न के दौरान भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी एवं कुबेर महाराज की पूजा करते हैं. इस दिन व्यापारी लोग अपना खाता बही बदलते हैं. इसलिए दिवाली पर व्यापारियों का नया साल शुरू होता है. गुजरात में दीपावली से ही महालक्ष्मी वर्ष की शुरुआत माना जाता है.

2025 का मुहूर्त (Diwali 2025)
पूजा का शुभ मुहूर्त: 18:42 से 20:18 (1 घंटा 36 मिनट)
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2025, 14:52 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर 2025, 17:11 बजे

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