Uttar Pradesh : उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव का बिगुल बज गया है. इन सीटों पर मतदान 13 नवंबर और मतगणना 23 नवंबर को कराई जाएगी. इनमें से आठ सीटों पर उपचुनाव विधायकों के सांसद चुने जाने की वजह से कराया जा रहा है. वहीं एक सीट पर उपचुनाव वहां 2022 में जीते विधायक को सजा सुनाए जाने की वजह से हो रहा है. नौ सीटों के इस उपचुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा है ।
आकाश आनंद भी पार्टी प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार करेंगे
इसी बीच सभी पार्टियां जोरों शोरों से तैयारी में जुटी हैं। लोकसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली बसपा के सामने उपचुनाव में भी खाता खोलने की बड़ी चुनौती दिखाई दे रही है। बसपा अकेले ही सभी सीटों पर चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है। पार्टी ने जातीय समीकरण देखते हुए प्रत्याशी भी तय कर लिए हैं, लेकिन उनकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए बसपा के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद भी पार्टी प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार करेंगे। वैसे तो जिन नौ सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें से एक भी बसपा ने साल 2022 के आम चुनाव में नहीं जीती थी। उस चुनाव में पार्टी को सिर्फ बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट पर सफलता मिली थी।
भाजपा की कमान खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों में ली
वहीं, भाजपा की ओर से उपचुनाव की कमान खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों में ली है। वह उपचुनाव वाली सभी सीटों का दौरा कर चुके हैं। वहां पहले संगठन के लोगों के साथ बैठकर बात की और फिर उनके मिले फीडबैक के आधार पर वहां के अफसरों को लोगों की समस्याओं को तत्काल दूर करने के भी निर्देश दिए।उपचुनाव के लिए भाजपा ने अपनी जमीनी तैयारी पूरी कर ली है। सभी सीटों का सर्वे पूरा हो चुका है। चुनावी तैयारी के मद्देनजर हर सीट के प्रभारी तय हो चुके हैं। प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है। माना जा रहा है कि इसी हफ्ते बीजेपी प्रत्याशियों की भी घोषणा कर सकती है। इससे पहले समाजवादी पार्टी ने अपने छह उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है।
सपा और कांग्रेस साथ मिलकर लड़ेंगे उपचुनाव
यूपी के उपचुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ मिल कर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है और 6 सीटों पर प्रत्याशी भी घोषित कर दिए हैं।कांग्रेस वैसे तो सभी सीटों पर प्रचार में जुटी थी लेकिन सपा ने एकतरफा छह सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिए तो इससे कांग्रेस हैरत में आ गई क्योंकि फूलपुर और मझवां पर वह खुद दावा कर रही थी। पर सीटों को लेकर चल रही तकरार के बीच भी कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन तय है। सपा को अहसास है कि मुस्लिमों का समर्थन उसे तभी मिलेगा जब गठबंधन के तौर वह उतरेंगे। इसीलिए कांग्रेस को साथ लेकर ही चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
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