Jharkhand Economic Survey: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Jharkhand Economic Survey) पेश किया गया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में आंकड़े रखते हुए दावा किया कि झारखंड की अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में मजबूत आधार तैयार किया है और राज्य अब तेज विकास दर की ओर अग्रसर है।
दोगुना हुआ वास्तविक GSDP
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 2011-12 की स्थिर कीमतों पर झारखंड का वास्तविक सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 1,50,918 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 3,03,178 करोड़ रुपये हो गया है। यानी लगभग 13 वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था दोगुनी हो गई। 2018-19 से 2024-25 के बीच सात वर्षों में से चार वर्षों में झारखंड की विकास दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही। कोविड-19 महामारी के दौरान भी राज्य का आर्थिक संकुचन 5.30 प्रतिशत रहा, जो राष्ट्रीय गिरावट 5.8 प्रतिशत से कम गंभीर था।
Read More: रांची में ‘बॉर्डर 2’ का तूफानी आगाज़, हाउसफुल शो और तालियों से गूंजे सिनेमाघर
आगे की विकास दर का अनुमान
सर्वेक्षण के मुताबिक, 2025-26 (Jharkhand Economic Survey) में वास्तविक GSDP 3,21,892 करोड़ रुपये और 2026-27 में 3,41,064 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। 2025-26 में 6.17 प्रतिशत वृद्धि, 2026-27 में 5.96 प्रतिशत वृद्धि। वर्तमान कीमतों पर राज्य की अर्थव्यवस्था 2025-26 में 5.6 लाख करोड़ रुपये और 2026-27 में करीब 6.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। ये अनुमान राज्य की स्थिर विकास दिशा को दर्शाते हैं।
प्रति व्यक्ति आय में ऐतिहासिक उपलब्धि
झारखंड (Jharkhand Economic Survey) की प्रति व्यक्ति आय ने पहली बार 1 लाख रुपये का आंकड़ा पार किया है। 2024-25 में यह 1,16,663 रुपये तक पहुंच गई। वास्तविक (स्थिर कीमतों पर) प्रति व्यक्ति आय 68,357 रुपये रही, जो 2011-12 के मुकाबले 65.7 प्रतिशत की वृद्धि है। यह लगभग 4 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है। यह उपलब्धि राज्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय तक झारखंड कम आय वाले राज्यों में गिना जाता रहा है।
सेवा क्षेत्र बना विकास का इंजन
आर्थिक सर्वेक्षण में सेवा क्षेत्र को विकास का प्रमुख चालक बताया गया है। 2025-26 में सेवा क्षेत्र का GSVa 1,37,730 करोड़ रुपये, 2026-27 में 1,48,479 करोड़ रुपये।क्रमशः 8.84 प्रतिशत और 7.81 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ सेवा क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और वित्तीय सेवाओं में विस्तार इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
25 वर्षों में बजट 20 गुना बढ़ा
राज्य गठन के बाद से झारखंड का बजट आकार 20 गुना से अधिक बढ़ गया है।
- 2001-02 में बजट: 6,067 करोड़ रुपये
- 2024-25 (वास्तविक): 1,16,892 करोड़ रुपये
- 2025-26 (प्रस्तावित): 1,45,400 करोड़ रुपये
कुल व्यय 2023-24 में पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के पार गया। यह राज्य की वित्तीय क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाता है।
राजकोषीय अनुशासन और बैंकिंग विस्तार
झारखंड (Jharkhand Economic Survey) ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का दावा किया है। 2020-21 को छोड़कर राज्य का राजकोषीय घाटा FRBM की 3 प्रतिशत सीमा के भीतर रहा। महामारी के दौरान यह 5 प्रतिशत तक पहुंचा था। बैंकिंग ढांचे में भी विस्तार हुआ है। सितंबर 2025 तक राज्य में 3,449 बैंक शाखाएं और 3,338 एटीएम कार्यरत हैं। दिसंबर 2020 से अब तक 198 नई शाखाएं जोड़ी गईं। मार्च 2014 से सितंबर 2025 के बीच बैंक जमा 220 प्रतिशत बढ़कर 3,79,735 करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऋण वितरण 124 प्रतिशत बढ़कर 1,58,714 करोड़ रुपये पहुंच गया।
कृषि क्षेत्र की स्थिर भूमिका
कृषि और संबद्ध गतिविधियों का 2025-26 में राज्य के GSVa में 12.3 प्रतिशत योगदान रहने का अनुमान है। कृषि GSVa में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 28,470 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि सेवा और उद्योग क्षेत्र तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कृषि अब भी महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।
आर्थिक दिशा – स्थिरता से विस्तार की ओर
झारखंड का आर्थिक सर्वेक्षण संकेत देता है कि राज्य अब संसाधन-आधारित अर्थव्यवस्था से विविधीकृत विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। सेवा क्षेत्र की मजबूती, बजट विस्तार और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि इसे नई दिशा दे रही है। आने वाले बजट में इन अनुमानों को किस तरह नीतिगत समर्थन मिलता है, इस पर राज्य की विकास यात्रा निर्भर करेगी।
यह भी पढ़ें- Border 2 Movie Update: रिलीज से 24 दिन पहले मेकर्स का बड़ा दांव, इस दिग्गज सिंगर की हुई धमाकेदार एंट्री



