Kashmir on Alert After Khamenei Death: ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव का असर अब भारत के संवेदनशील क्षेत्र कश्मीर में भी दिखाई देने लगा है। ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत की खबर के बाद घाटी में विरोध प्रदर्शनों की सूचनाओं को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं।सोमवार (02 मार्च) से कश्मीर के सभी जिलों में प्रतिबंध लागू (Kashmir on Alert After Khamenei Death) करने की घोषणा की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए लिया गया है।
प्रशासन का एहतियाती कदम
वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी था। एक अधिकारी ने बताया कि ‘एहतियाती उपाय के तौर पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।’ घाटी में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। संवेदनशील इलाकों में गश्त तेज कर दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अशांति को रोका जा सके।
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लोगों में आक्रोश, शांति की अपील
खामेनेई की मौत की खबर के बाद जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों (Kashmir on Alert After Khamenei Death) में लोगों के आक्रोश की झलक देखने को मिली। इस बीच मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सभी समुदायों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरान की घटनाओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है और किसी भी तरह की तनावपूर्ण गतिविधि से बचने का आग्रह किया गया है।
स्कूल-कॉलेज दो दिन बंद
स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने भी एहतियाती कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री Sakina Itoo ने घोषणा की है कि घाटी के सभी स्कूल और कॉलेज दो दिनों तक बंद रहेंगे।गौरतलब है कि 70 दिन की सर्दियों की छुट्टियों के बाद सोमवार से स्कूल खुलने वाले थे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, नजर हालात पर
प्रशासन का कहना है कि प्रतिबंध अस्थायी हैं और हालात सामान्य होने पर समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों को किसी तरह की अफवाहों से बचने और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है। इंटरनेट और सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि भड़काऊ सामग्री के प्रसार को रोका जा सके।
अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का स्थानीय असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ना नई बात नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक राजनीतिक घटनाएं स्थानीय भावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए प्रशासन की प्राथमिकता शांति और स्थिरता बनाए रखना है। इस बार प्रशासन ने पहले ही दिन से सख्त रुख अपनाकर यह संकेत दिया है कि किसी भी तरह की अशांति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आगे क्या?
फिलहाल घाटी में स्थिति शांत बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। प्रतिबंधों की अवधि और स्वरूप पर आने वाले दिनों में समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने दोहराया है कि प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द और शांति सर्वोच्च प्राथमिकता है। कश्मीर में उठाया गया यह कदम दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के बीच भी स्थानीय प्रशासन हालात को नियंत्रण (Kashmir on Alert After Khamenei Death) में रखने के लिए सक्रिय रणनीति अपना रहा है।
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