US-Iran Peace Deal: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता (Peace Deal) कराने की वैश्विक कोशिशें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान इस ऐतिहासिक वार्ता की मेजबानी कर रहा है और इस्लामाबाद को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। करीब 11 हजार जवानों की तैनाती और होटल सेरेना के बाहर ‘रेड जोन’ की सुरक्षा के बावजूद, इस शांति वार्ता की सफलता पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि पाकिस्तान की इस मेहनत पर पानी फिर सकता है, क्योंकि धरातल पर स्थितियां शांति के बजाय ‘प्लान-बी’ यानी फिर से युद्ध की शुरुआत की ओर इशारा कर रही हैं।
शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा भरोसे की कमी और क्षेत्रीय हितों का टकराव है। जहां एक ओर पाकिस्तान इस बैठक को सफल बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान और अमेरिका के बीच चार ऐसे मुख्य अड़ंगे फंस गए हैं, जिनका समाधान फिलहाल नजर नहीं आता। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर जारी तनाव से लेकर लेबनान और इजरायल के आंतरिक राजनीतिक दबाव तक, हर मोड़ पर यह डील टूटती नजर आ रही है। आइए विस्तार से जानते हैं वे कौन से 4 संकेत हैं जो इस शांति वार्ता को विफल बना सकते हैं। (US-Iran Peace Deal)
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1. होर्मुज जलडमरूमध्य पर ‘पहरा’ और ट्रंप का ‘प्लान-बी’
सीजफायर की घोषणा के समय यह तय हुआ था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है। 72 घंटे बीत जाने के बाद भी ईरान ने वहां अपना कड़ा नियंत्रण बनाए रखा है। शुक्रवार को केवल 5 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई, जिसे अमेरिका ने युद्ध विराम का स्पष्ट उल्लंघन माना है। इसी के चलते राष्ट्रपति ट्रंप अब ‘प्लान-बी’ पर विचार कर रहे हैं और यूरोपीय देशों के साथ-साथ मिडिल ईस्ट के अपने सहयोगियों से सैन्य विकल्पों पर सुझाव मांग रहे हैं। (US-Iran Peace Deal)
2. लेबनान और हिजबुल्लाह का पेच
शांति वार्ता में लेबनान एक बड़ा कांटा बनकर उभरा है। अमेरिका चाहता है कि लेबनान के मुद्दे पर वाशिंगटन में अलग से बातचीत हो, जिसमें इजरायल भी शामिल हो। हालांकि, ईरान को इस पर सख्त ऐतराज है। ईरान की संसद के स्पीकर गालिबफ का मानना है कि लेबनान पर चर्चा भी पाकिस्तान की बैठक का हिस्सा होनी चाहिए। ईरान को डर है कि लेबनान की सरकार अमेरिका के साथ कोई ऐसी गुप्त डील कर सकती है जिससे हिजबुल्लाह के लड़ाके अलग-थलग पड़ जाएं और संकट में आ जाएं। (US-Iran Peace Deal)
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3. मुज्तबा खामनेई का ‘जंग के लिए तैयार रहो’ संदेश
ईरान को इजरायल की नीयत पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामनेई ने अपने लड़ाकों के लिए एक आधिकारिक संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि “दुश्मन वार्ता का पालन नहीं करेगा, इसलिए सभी लोग जंग के लिए तैयार रहिए।” यह संदेश साफ करता है कि ईरान टेबल पर बातचीत तो कर रहा है, लेकिन उसका मानस समझौते से ज्यादा सैन्य शक्ति के प्रदर्शन की ओर है। (US-Iran Peace Deal)
4. इजरायल का आंतरिक दबाव और नेतन्याहू की मजबूरी
शांति वार्ता का सबसे बड़ा विरोध इजरायल के भीतर से हो रहा है। इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेन्नेट ने इस डील को “इतिहास की सबसे खराब डील” करार दिया है। इजरायल में अगले साल चुनाव होने हैं और बेंजामिन नेतन्याहू पर विपक्ष का भारी दबाव है कि वे ईरान को किसी भी प्रकार की राहत न दें। ऐसे में नेतन्याहू के लिए झुकना राजनीतिक आत्महत्या जैसा हो सकता है, जिससे सीजफायर मीटिंग के विफल होने की संभावना 90% तक बढ़ गई है। (US-Iran Peace Deal)
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समझौते की जटिल शर्तें
दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं;
अमेरिका की शर्तें: ईरान परमाणु हथियार न बनाए, यूरेनियम बाहर भेजे और अपने प्रॉक्सी संगठनों (हिजबुल्लाह, हूती) को खत्म करे।
ईरान की मांगें: मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सैन्य बेस खत्म हों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के संप्रभु नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले। US-Iran Peace Deal



