US Change Coup Plan in Iran: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। व्हाइट हाउस ने अब ईरान में सैन्य तख्तापलट (Regime Change) का इरादा फिलहाल टाल दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस समय किसी भी ऐसी बड़ी सैन्य कार्रवाई से बचना चाहता है जो उसे एक अंतहीन युद्ध की ओर धकेल दे, खासकर तब जब अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन (Midterm Elections) नजदीक हैं।
इस नीतिगत बदलाव के पीछे दो सबसे महत्वपूर्ण तर्क दिए जा रहे हैं। पहला यह कि अमेरिका अब जमीनी स्तर पर अपने सैनिकों को ईरान की धरती पर उतारने का जोखिम नहीं लेना चाहता। ‘टेलीग्राफ ब्रिटेन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान जैसे भौगोलिक रूप से जटिल देश में तख्तापलट सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को कम से कम 10 लाख सैनिकों की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान स्थितियों में संभव नहीं है। दूसरी ओर, ईरान की आम जनता का अपेक्षित समर्थन न मिलना भी ट्रंप प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप की अपील के बावजूद ईरानी नागरिक उस तरह से सड़कों पर नहीं उतरे जैसा कि वाशिंगटन ने अनुमान लगाया था। (US Change Coup Plan in Iran)
पुरानी गलतियों से लिया सबक
अमेरिकी थिंक-टैंक और आउटलेट ‘एक्सियोस’ के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन पिछली ऐतिहासिक गलतियों को दोहराने के मूड में नहीं है। अमेरिका ने अतीत में कई देशों में लोकतंत्र बहाली के नाम पर हस्तक्षेप किया, लेकिन उसका परिणाम हमेशा नकारात्मक रहा। (US Change Coup Plan in Iran)
- इराक (2003): सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए अमेरिका ने 2 लाख सैनिक उतारे, कब्जा भी किया, लेकिन 2011 तक आते-आते उसे वहां से हटना पड़ा। आज वहां अमेरिका विरोधी शिया गठबंधन की सरकार है। इस युद्ध में अमेरिका ने अपने 4550 जांबाज सैनिक खोए।
- अफगानिस्तान (2011-2021): 20 साल तक तालिबान से लड़ने और अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी अंततः अमेरिका को काबुल छोड़ना पड़ा और सत्ता फिर से तालिबान के हाथ में आ गई। इस संघर्ष में 2459 अमेरिकी सैनिकों की जान गई। (US Change Coup Plan in Iran)
वेनेजुएला और 1953 का कड़वा इतिहास
हाल ही में वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने की कोशिश भी नाकाम रही, जिससे अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी हुई। इसके अलावा, 1953 में सीआईए की मदद से ईरान में किए गए तख्तापलट का अंजाम 1979 की इस्लामिक क्रांति के रूप में सामने आया था। इन सभी अनुभवों ने व्हाइट हाउस को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सत्ता परिवर्तन बाहरी ताकतों के बजाय आंतरिक बदलाव से ही संभव है। (US Change Coup Plan in Iran)
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ट्रंप प्रशासन के भीतर बढ़ता विरोध
वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के भीतर ही इस युद्ध को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव ने आरोप लगाया है कि अमेरिका अब अपने हितों के बजाय इजराइल और सऊदी अरब के हितों के लिए काम कर रहा है। खुफिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान अमेरिका के लिए कोई सीधा खतरा नहीं था, फिर भी क्षेत्रीय सहयोगियों के दबाव में आकर यह हमला किया गया। (US Change Coup Plan in Iran)

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ईरान में तख्तापलट न करने के 5 प्रमुख कारण
भारी सैन्य नुकसान का डर: ईरान की सेना और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका को भारी जनहानि की आशंका है।
जनसमर्थन का अभाव: ट्रंप की अपील के बावजूद ईरानी जनता का विद्रोह के लिए सड़कों पर न उतरना।
आर्थिक बोझ: एक और लंबे युद्ध का बोझ अमेरिकी अर्थव्यवस्था और करदाताओं पर डालना ट्रंप के लिए चुनाव में महंगा पड़ सकता है।
विफल पिछला रिकॉर्ड: इराक, अफगानिस्तान और वेनेजुएला में मिली विफलता ने अमेरिकी आत्मविश्वास को चोट पहुँचाई है।
आंतरिक राजनीतिक दबाव: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान से कोई सीधा खतरा नहीं है, जिससे युद्ध का औचित्य साबित करना मुश्किल हो रहा है। (US Change Coup Plan in Iran)



