Trump Politics: जनवरी 2026 के शुरुआती महीनों ने दुनियाभर की राजनीति में हलचल मचा दी है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल का पहला साल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन उनके फैसलों ने वैश्विक स्तर पर तूफान खड़ा कर दिया है। वेनेजुएला, ग्रीनलैंड, नॉर्वे और यूरोप के कई देशों से जुड़े उनके निर्णयों ने न सिर्फ अमेरिका की विदेश नीति को चुनौती दी है, बल्कि पूरी दुनिया को एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की ये हरकतें केवल अमेरिका की ताकत बढ़ाने की रणनीति हो सकती हैं, या फिर 80 साल के इस नेता की व्यक्तिगत कुंठा और नाराजगी का नतीजा भी। नोबेल पुरस्कार न मिलने से लेकर निजी गुस्से तक, ट्रंप के फैसले अब अमेरिका और दुनिया दोनों के लिए खतरे की घंटी बन चुके हैं।
Trump Politics- राजनीति और अराजकता का महीना
जनवरी के महीनों में कई ऐसे घटनाक्रम हुए, जिनसे वैश्विक राजनीति की दिशा बदली। ट्रंप ने आधी रात को वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठवाया, ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की जिद दिखाई, नाटो को कमजोर करने की कोशिश की और यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निजी संदेशों को सार्वजनिक करना भी ट्रंप की विवादास्पद रणनीति का हिस्सा था। विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी की इन घटनाओं में एक पैटर्न नजर आता है अपमान, दबाव और अराजकता। सवाल यही है कि क्या यह अमेरिका को सुपर पावर बनाने की रणनीति है या ट्रंप की निजी कुंठा का नतीजा?
Trump Politics- डोनाल्ड ट्रंप की ‘पॉलिटिक्स’
ट्रंप ने मैक्रों के निजी और कूटनीतिक संदेशों के स्क्रीनशॉट अपने सोशल मीडिया पर साझा किए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फ्रांस उनके बनाए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल नहीं हुआ, तो फ्रांस की वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। विशेषज्ञ इसे “बिलो द बेल्ट पॉलिटिक्स” कह रहे हैं। इस तरह की राजनीति ने वैश्विक नेताओं के बीच भरोसे को पूरी तरह तोड़ दिया है। आज कोई भी नेता ट्रंप से निजी बातचीत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी बातें सार्वजनिक कर दी जाएंगी।
Trump Politics- ग्रीनलैंड और नोबेल विवाद
ट्रंप का ग्रीनलैंड पर कब्ज़े का जुनून 2019 के अपमान का बदला लगता है, जब डेनमार्क ने उनकी खरीदारी की पेशकश ठुकरा दी थी। 2026 में ट्रंप कह रहे हैं ‘ना खाता, ना बही, जो मैं कहूं वही सही।’ उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नोबेल पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जाहिर की और ग्रीनलैंड पर हमला करने की धमकी दी। कनाडा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा घोषित करना और कनाडा को 51वां राज्य बनाने की बातें करना उनके समर्थकों के अनुसार “ग्रेटर अमेरिका विज़न” है, जबकि आलोचक इसे 19वीं सदी का साम्राज्यवाद मानते हैं।

Trump Politics- रूस और चीन का फायदा
ट्रंप की इस नीति का सबसे बड़ा फायदा रूस और चीन को हो रहा है। नाटो में दरार पड़ चुकी है और यूरोप अब अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकता। भारत पर लगाए गए टैरिफ का असर व्यापारियों, मजदूरों और फैक्ट्रियों पर दिख रहा है। नौकरियों के संकट के बीच सवाल उठता है क्या किसी राष्ट्रपति का निजी गुस्सा दुनिया की नीति बन सकता है? विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप अब जिस चौराहे पर खड़े हैं, एक रास्ता अमेरिका को मजबूत बनाता है, जबकि दूसरा पूरी दुनिया की तबाही की ओर। यदि उनकी ग्रीनलैंड और यूरोप को लेकर जिद बनी रही, तो 2026 के अंत तक नाटो का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
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Trump Politics- अमेरिका महान या खतरे में?
आज पूरी मानवता एक संवेदनशील दौर से गुजर रही है। एक परमाणु संपन्न देश का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिनके फैसले नीति से ज्यादा निजी गुस्से पर आधारित दिखते हैं। सवाल यही है क्या यह अमेरिका को महान बनाने की कोशिश है या सिर्फ एक आदमी की सनक?डोनाल्ड ट्रंप को लेकर आपका क्या नजरिया है? कमेंट सेक्शन में अपनी राय साझा करें।



