THAAD Air Defense System: दुनिया की सबसे ताकतवर मिलिट्री फोर्स में से एक माने जाने वाले अमेरिका के हाई-टेक एयर डिफेंस सिस्टम पर अब सवाल उठ रहे हैं। हाल के हमलों में अमेरिका के स्टेट-ऑफ-द-आर्ट THAAD Air Defense System से जुड़े कुछ रडार सिस्टम के खराब होने की खबर है।
इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेड ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे मॉडर्न एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी की कमियां सामने आ गई हैं। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह घटना सिर्फ मिलिट्री नुकसान ही नहीं है, बल्कि भविष्य की लड़ाइयों के लिए भी खतरनाक सिग्नल हो सकती है।
क्या है THAAD एयर डिफेंस सिस्टम?
THAAD Air Defense System, या टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस, यूनाइटेड स्टेट्स का एक बहुत एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। इसे खास तौर पर दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है।
यह सिस्टम मिसाइल को उसके आखिरी स्टेज में इंटरसेप्ट करता है और टक्कर से उसे खत्म कर देता है। यह एक्सप्लोसिव वॉरहेड का इस्तेमाल नहीं करता, बल्कि टारगेट को खत्म करने के लिए ‘हिट-टू-किल’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। इस सिस्टम के मुख्य हिस्से हैं –
- हाई-रेंज रडार
- इंटरसेप्टर मिसाइल
- लॉन्चर
- कमांड एंड कंट्रोल यूनिट
इनमें रडार सबसे ज़रूरी भूमिका निभाता है, क्योंकि यह आने वाली मिसाइलों का पता लगाता है और इंटरसेप्टर को निर्देश देता है।
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THAAD Air Defense System: रडार सिस्टम के खराब होने से क्यों बढ़ी चिंता?
हाल के हमलों में सबसे चिंता की बात THAAD Air Defense System के रडार का खराब होना है। रडार को किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम की आंख और दिमाग माना जाता है। अगर रडार खराब हो जाए, तो पूरा सिस्टम लगभग बेकार हो सकता है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान के सपोर्ट वाले हमलों में लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इन हमलों ने दिखाया कि दुनिया के सबसे एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम भी एक साथ दागे गए कई हथियारों से भारी पड़ सकते हैं।
शाहेड ड्रोन और मिसाइलों की नई स्ट्रैटेजी
हाल के सालों में जंग की स्ट्रैटेजी तेजी से बदल रही है। सस्ते लेकिन असरदार ड्रोन अब बड़े डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। ईरान में बने शाहेड ड्रोन को खास तौर पर ‘कम कीमत वाले लेकिन ज्यादा असर वाले’ हथियार माना जाता है। उनकी खासियतों में लंबी दूरी की उड़ान, कम रडार सिग्नेचर और झुंड में हमला करने की क्षमता शामिल हैं।
जब ऐसे कई ड्रोन और मिसाइल एक साथ हमला करते हैं, तो THAAD Air Defense System जैसे महंगे सिस्टम पर भी बहुत ज्यादा दबाव पड़ सकता है।
THAAD Air Defense System: क्या बदल रहा है मॉडर्न जंग का तरीका?
डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह घटना भविष्य के युद्धों की ओर इशारा करती है। पहले, महंगे और भारी हथियारों का युद्धों में बोलबाला था, लेकिन अब, सस्ते ड्रोन और स्मार्ट मिसाइलें बड़े डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे रही हैं। अब, सिर्फ एक डिफेंस सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय, देशों को मल्टी-लेयर्ड डिफेंस बनाने होंगे।
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मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम की जरूरत
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भविष्य में सिक्योरिटी के लिए मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम जरूरी होगा। इसमें लंबी दूरी की मिसाइल डिफेंस, मीडियम रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, कम दूरी का ड्रोन डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर शामिल हो सकते हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में, THAAD Air Defense System जैसे सिस्टम अकेले युद्ध नहीं जीत सकते। उन्हें कई दूसरी टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर काम करना होगा।
THAAD Air Defense System: नई टेक्नोलॉजी जो बदल सकती हैं युद्ध का खेल
डिफेंस साइंटिस्ट अब भविष्य में ऐसे हमलों को बेहतर तरीके से रोकने के लिए नई टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ खास टेक्नोलॉजी में शामिल हैं:
लेजर वेपन: लेजर वेपन हवा में ड्रोन या मिसाइल को तेज़ी से जला सकते हैं। ये कम कीमत वाले भी होते हैं।
माइक्रोवेव वेपन: ये वेपन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को डिसेबल कर सकते हैं, जिससे ड्रोन और मिसाइल पर कंट्रोल खत्म हो सकता है।
कैमीफ्लाज और डिकॉय: डिफेंस सिस्टम को छिपाने या डिकॉय टारगेट बनाने की टेक्नोलॉजी भी तेजी से डेवलप हो रही हैं।
इन सबके साथ, THAAD Air Defense System सिस्टम को भी लगातार अपग्रेड किया जा रहा है।
क्या यह आने वाले किसी बड़े युद्ध का संकेत है?
डिफेंस एनालिस्ट का मानना है कि अगर दुनिया के सबसे एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तो यह ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा संकेत है।
इसका मतलब यह भी हो सकता है कि भविष्य के युद्ध पहले से कहीं ज्यादा टेक्नोलॉजिकल, तेज और खतरनाक होंगे। इस वजह से, दुनिया की बड़ी मिलिट्री ताकतों को अपनी स्ट्रैटेजी बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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