Iran Denies Talks with Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ 5 दिनों के लिए जंग रोकने के दावे ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है, लेकिन तेहरान इस दावे को सिरे से खारिज कर रहा है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से आई तीखी प्रतिक्रियाओं ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की कूटनीतिक चर्चा की खबरें महज कोरी कल्पना हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और युद्ध की समाप्ति को लेकर ईरान के रुख में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में हेरफेर करने की एक सोची-समझी साजिश है।
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अपनी सेना का मनोबल बढ़ाते हुए भावुक नजर आए। उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि वह मातृभूमि के बहादुर रक्षकों के हाथों और बाजुओं को चूमते हैं। पेजेशकियान ने जोर देकर कहा कि ईरान का सुरक्षित और शांत कल जनता के प्रतिरोध और रक्षकों की एकता पर निर्भर है। ईरान की ओर से आ रहे ये बयान इस बात की तस्दीक करते हैं कि ट्रंप के ‘डीलमेकर’ वाले दावे और ‘सत्ता परिवर्तन’ के एजेंडे को ईरान एक ‘साइकोलॉजिकल वॉर’ (मनोवैज्ञानिक युद्ध) के रूप में देख रहा है, जिसका उद्देश्य इजराइल और अमेरिका को मौजूदा दलदल से बाहर निकालना है। Iran Denies Talks with Trump
Iran Denies Talks with Trump- ईरानी स्पीकर का कड़ा रुख
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर गालिबाफ ने ट्रंप के दावों को ‘फेक न्यूज’ करार देते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल जिस संकट में फंसे हैं, उससे ध्यान भटकाने के लिए ऐसे झूठे नैरेटिव फैलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘बातचीत की खबरें फर्जी हैं। इनका इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने के लिए किया जा रहा है। हमारी जनता हमलावरों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग कर रही है।’ गालिबाफ ने साफ किया कि पूरी लीडरशिप और अधिकारी देश के सुप्रीम लीडर के पीछे चट्टान की तरह खड़े हैं। Iran Denies Talks with Trump

ट्रंप पर अविश्वास की 5 बड़ी वजहें- Iran Denies Talks with Trump
ईरान द्वारा ट्रंप के प्रस्ताव को ठुकराने के पीछे कई ठोस ऐतिहासिक और कूटनीतिक कारण है-
सीधी बातचीत का अभाव: ईरान के मुताबिक, जेरेड कुशनर या स्टीव विटकॉफ जैसे अमेरिकी दूतों से उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई है। जब कोई आधिकारिक चैनल ही नहीं खुला, तो बातचीत का दावा आधारहीन है।
2018 का कड़वा अनुभव: ईरान नहीं भूला है कि ट्रंप ने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) को 2018 में एकतरफा तौर पर तोड़ दिया था। जो नेता अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान न करे, उस पर दोबारा भरोसा करना नामुमकिन है।
‘सत्ता परिवर्तन’ का एजेंडा: ट्रंप ने खुलेआम कहा कि वह ईरान के ‘नए लोगों’ से बात कर रहे हैं, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता पर हमला और सत्ता पलटने की कोशिश मानता है। Iran Denies Talks with Trump
पीआर स्टंट और घरेलू राजनीति: ईरान का मानना है कि ट्रंप खुद को एक ‘महान शांतिदूत’ दिखाने के लिए अमेरिकी जनता के सामने यह नाटक कर रहे हैं।
एकतरफा और सख्त शर्तें: यूरेनियम संवर्धन रोकने और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बंद करने की ट्रंप की मांग को ईरान ‘कूटनीति’ नहीं बल्कि ‘आत्मसमर्पण’ मानता है। Iran Denies Talks with Trump
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भारत में ईरानी दूतावास की प्रतिक्रिया
भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भी ट्रंप के दावों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हमलावरों को ऐसी सजा दी जाएगी जो भविष्य के लिए मिसाल बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है और यह सब होर्मुज संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार में मचे हाहाकार को शांत करने की एक नाकाम कोशिश है। ईरान अपने रुख पर कायम है और किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। Iran Denies Talks with Trump
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होर्मुज जलडमरूमध्य है तनाव का असली केंद्र
ट्रंप के दावे के पीछे की असली छटपटाहट ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का बंद होना है। दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर कड़ा रुख अपनाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में है। ट्रंप चाहते हैं कि बिना किसी बड़ी रियायत के ईरान इस मार्ग को सुचारू कर दे, लेकिन ईरान इसे अपने सबसे बड़े रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है और बदले में ‘पूर्ण सम्मान’ और ‘अधिकार’ चाहता है। Iran Denies Talks with Trump



