Greenland Golden Dome Dispute: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड (Greenland Golden Dome Dispute) को लेकर आक्रामक रुख में दिख रहे हैं। इस बार मुद्दा केवल भू-राजनीतिक महत्व का नहीं, बल्कि मिसाइल रक्षा प्रणाली जिसे ट्रंप प्रशासन ‘गोल्डन डोम’ कह रहा है कि तैनाती से जुड़ा है। ट्रंप का दावा है कि यह सिस्टम न सिर्फ अमेरिका, बल्कि उसके सहयोगियों की सुरक्षा भी मजबूत करेगा। लेकिन यूरोप के कई देशों और खास तौर पर कनाडा ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।
‘गोल्डन डोम’ पर असहमति – सुरक्षा या दबाव?
ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड में ‘गोल्डन डोम’ की तैनाती उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र को सुरक्षित करेगी। उनका कहना है कि इससे कनाडा को भी सीधा लाभ मिलेगा। इसके उलट, कनाडा की सरकार इस योजना को क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ने वाला कदम मानती है। ओटावा का कहना है कि किसी भी नई रक्षा व्यवस्था पर व्यापक सहमति और पारदर्शिता जरूरी है।

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चीन फैक्टर – व्यापार से बढ़ा सियासी तापमान
तनाव तब और बढ़ गया जब कनाडा ने चीन के साथ एक बड़े व्यापार समझौते की घोषणा की। इस समझौते के तहत कनाडाई उत्पादों के लिए अरबों डॉलर के नए निर्यात अवसर खुलने का दावा किया गया। कनाडा का तर्क है कि विविध व्यापारिक साझेदार आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी हैं। यहीं से ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कनाडा अमेरिकी सुरक्षा ढांचे से दूरी बनाकर चीन के साथ आर्थिक रिश्ते बढ़ाता है, तो उसे रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि बीजिंग ‘एक साल के भीतर’ कनाडा को अपने प्रभाव में ले सकता है हालांकि इस बयान को कई विशेषज्ञ अतिशयोक्तिपूर्ण बता रहे हैं।
ट्रुथ सोशल और सार्वजनिक मंचों से तीखे बयान
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कनाडा की आलोचना करते हुए लिखा कि ‘गोल्डन डोम’ का विरोध (Greenland Golden Dome Dispute) करना अपने ही हितों के खिलाफ है। उनके अनुसार, यह प्रणाली कनाडा की रक्षा भी करेगी, फिर भी ओटावा चीन के साथ व्यापार को तरजीह दे रहा है। इसके साथ ही, दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के एक सत्र के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि कनाडा को अमेरिका से मिलने वाली ‘मुफ्त सुरक्षा सुविधाओं’ के लिए अधिक आभारी होना चाहिए। यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद असहजता को और गहरा कर गई।
अलग एंगल – क्या यह असल में प्रभाव की लड़ाई है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद केवल मिसाइल सिस्टम या व्यापार समझौतों तक सीमित नहीं है। असल लड़ाई वैश्विक प्रभाव और भरोसे की है। अमेरिका चाहता है कि उसके पारंपरिक सहयोगी सुरक्षा और रणनीति में उसी के साथ खड़े रहें, जबकि कनाडा जैसे देश बहुध्रुवीय दुनिया में अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं। ग्रीनलैंड (Greenland Golden Dome Dispute) इस टकराव का प्रतीक बन गया है जहां सुरक्षा, संसाधन और भू-राजनीति एक-दूसरे से टकरा रहे हैं।
आगे क्या?
आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या अमेरिका और कनाडा इस मुद्दे पर कोई साझा रास्ता निकाल पाते हैं या फिर यह विवाद ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में और दरार डाल देगा। इतना तय है कि ग्रीनलैंड (Greenland Golden Dome Dispute), ‘गोल्डन डोम’ और चीन तीनों मिलकर वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।
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