India Israel Trade: प्रधानमंत्री Narendra Modi अपने दो दिवसीय इजराइल दौरे पर हैं। बुधवार को उनके पहुंचने पर इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने आधिकारिक स्वागत किया। दौरे के दौरान पीएम मोदी ने इजराइली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की बात कही। इस कूटनीतिक सक्रियता के बीच सबसे ज्यादा चर्चा व्यापारिक रिश्तों को लेकर हो रही है—आखिर इजराइल के साथ भारत का कारोबार कितना है और किस दिशा में बढ़ रहा है?
सितंबर 2025 में भारत को रहा व्यापारिक फायदा
ताजा आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2025 में India Israel Trade में भारत को लाभ की स्थिति मिली। इस महीने भारत ने इजराइल को लगभग 178 मिलियन डॉलर का निर्यात किया, जबकि वहां से 121 मिलियन डॉलर का आयात हुआ। इस तरह भारत का व्यापार संतुलन करीब 56.8 मिलियन डॉलर के फायदे में रहा।
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हालांकि सालाना तुलना में कुछ उतार-चढ़ाव भी दिखा। सितंबर 2024 के मुकाबले सितंबर 2025 में भारत का निर्यात लगभग 5 प्रतिशत घटा। पिछले साल यह आंकड़ा 188 मिलियन डॉलर के आसपास था, जो इस बार घटकर 178 मिलियन डॉलर रह गया। यानी निर्यात में करीब 9 से 10 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई।
आयात में तेज गिरावट
निर्यात की तुलना में आयात में ज्यादा गिरावट देखी गई। इजराइल से भारत का आयात लगभग 20 प्रतिशत कम हुआ। सितंबर 2024 में जहां आयात 152 मिलियन डॉलर था, वहीं सितंबर 2025 में यह घटकर 121 मिलियन डॉलर पर आ गया। यानी करीब 31 मिलियन डॉलर की कमी आई। आयात में आई यह गिरावट ही व्यापार संतुलन को भारत के पक्ष में ले गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में मांग, लॉजिस्टिक्स लागत और मुद्रा विनिमय दर जैसे कारक भी इन उतार-चढ़ावों को प्रभावित करते हैं। इसके बावजूद भारत-इजराइल व्यापार का आधार मजबूत बना हुआ है।
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किन उत्पादों का होता है सबसे ज्यादा कारोबार?
India Israel Trade को जिन प्रमुख वस्तुओं का निर्यात करता है, उनमें सेमी-कीमती पत्थर प्रमुख हैं। सितंबर 2025 में इनका निर्यात करीब 48.7 मिलियन डॉलर रहा। इसके अलावा उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स (करीब 10.4 मिलियन डॉलर) और इंजीनियरिंग उत्पाद (करीब 8 मिलियन डॉलर) भी अहम हिस्सेदारी रखते हैं।
मोती, कीमती पत्थर, मशीनरी, डीजल से जुड़े मोटर वाहन, वस्त्र, रेडीमेड कपड़े और कृषि उत्पाद भी बड़ी मात्रा में इजराइल भेजे जाते हैं। भारत का विविध औद्योगिक ढांचा और प्रतिस्पर्धी कीमतें इजराइली बाजार में उसे बढ़त दिलाती हैं।
दूसरी ओर, India Israel Trade से मुख्य रूप से निर्मित उर्वरक आयात करता है, जिनका मूल्य सितंबर 2025 में करीब 16.7 मिलियन डॉलर रहा। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक घटक (करीब 9.6 मिलियन डॉलर) भी आयात की अहम श्रेणी में शामिल हैं। कृषि तकनीक, सिंचाई उपकरण और हाई-टेक रक्षा उपकरण जैसे क्षेत्रों में भी इजराइल की विशेषज्ञता भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से नई उम्मीदें
दोनों देशों के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर भी बातचीत जारी है। यदि यह समझौता लागू होता है, तो टैरिफ में कमी और बाजार पहुंच में आसानी से व्यापार को नई गति मिल सकती है। खासकर भारतीय कृषि उत्पाद, वस्त्र और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इजराइल के बाजार में अधिक अवसर मिलेंगे।
व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि एफटीए लागू होने पर छोटे और मध्यम उद्योगों को भी लाभ होगा। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि तकनीकी सहयोग और संयुक्त निवेश परियोजनाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
रणनीतिक रिश्तों से आगे बढ़ता आर्थिक सहयोग
India Israel Trade के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और स्टार्ट-अप इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में दोनों देश लंबे समय से सहयोग कर रहे हैं। पीएम मोदी का यह दौरा इसी व्यापक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालिया आंकड़े बताते हैं कि उतार-चढ़ाव के बावजूद India Israel Trade संतुलित और संभावनाओं से भरा हुआ है। यदि प्रस्तावित समझौते आगे बढ़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और भी गहरी हो सकती है- जिसका सीधा लाभ भारतीय उद्योग, किसानों और निर्यातकों को मिल सकता है।
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