Khamenei Death: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देने लगा है। 28 फरवरी की सुबह इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्रीय हालात तेजी से बदले हैं। इन हमलों में ईरान को भारी क्षति पहुंचने की खबर है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत (Khamenei Death) की सूचना ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है।
Khamenei Death की खबर सामने आते ही कश्मीर के कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर इजराइल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पश्चिम एशिया में जारी हमले क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।
कश्मीर में विरोध, प्रशासन अलर्ट
श्रीनगर के कई इलाकों में छोटी-छोटी रैलियां देखी गईं। स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन अफवाहों पर नजर रखी जा रही है। इंटरनेट मीडिया पर भी कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिनमें कुछ भावनात्मक अपीलें और कुछ तीखे बयान शामिल हैं।
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हमलों के बाद ईरान में सत्ता समीकरण
ईरान में हमलों के बाद राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को लेकर तेजी से बदलाव हुए हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जनरल अहमद वाहिदी को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया है। अब अमेरिका और इजराइल के साथ जारी सैन्य टकराव से जुड़े अहम फैसले उन्हीं के नेतृत्व में लिए जाएंगे।
ईरान के सरकारी प्रसारण में कहा गया है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा। राजधानी तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रमुख सरकारी इमारतों के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं।
अमेरिका का बयान
हमलों के बाद अमेरिका की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरान में बेहतर नेतृत्व की संभावना अब खुली है। अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया कि कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना था। हालांकि इस बयान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई देशों ने संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Khamenei Death के बाद ईरान के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर नई खींचतान शुरू हो सकती है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से चल रहा तनाव और गहरा सकता है।
वैश्विक बाजारों पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। एशियाई शेयर बाजारों में भी अस्थिरता देखी गई। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत की स्थिति
भारत सरकार ने अब तक इस Khamenei Death पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है। पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत संतुलित रुख अपनाएगा और क्षेत्र में शांति की अपील करेगा। भारत के लिए ईरान और इजराइल दोनों ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश हैं।
आगे क्या?
Khamenei Death के बाद ईरान के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। वहीं, कश्मीर समेत अन्य क्षेत्रों में भी प्रशासन सतर्क है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने।
पश्चिम एशिया में जारी यह टकराव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ईरान, इजराइल और अमेरिका की अगली चाल पर टिकी है।



