India US trade deal statement: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। वाशिंगटन दौरे पर मौजूद जयशंकर ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत (India US trade deal statement) में कहा कि ‘ट्रेड वार्ता के ब्योरे तैयार किए जा रहे हैं’, लेकिन इस पर टिप्पणी करना फिलहाल उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।जयशंकर इन दिनों अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इसी कार्यक्रम से इतर उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार का रुख साफ किया।
‘ट्रेड डील वाणिज्य मंत्रालय का विषय’ – जयशंकर
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस ट्रेड डील से जुड़ी औपचारिक जिम्मेदारी वाणिज्य मंत्रालय के पास है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर उनकी ओर से बयान देना उचित नहीं होगा, क्योंकि बातचीत अभी प्रक्रियाधीन है। हालांकि, जयशंकर ने यह जरूर बताया कि इस ट्रेड डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच बातचीत (India US trade deal statement) हो चुकी है, और दोनों नेताओं ने इसके महत्व को लेकर सार्वजनिक संकेत दिए हैं। इससे यह साफ होता है कि समझौता उच्चतम राजनीतिक स्तर पर प्राथमिकता में है।
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विपक्ष का हमला – किसानों के हितों पर समझौते का आरोप
भारत में इस ट्रेड डील को लेकर सियासी बहस तेज होती जा रही है। विपक्षी दल सरकार से इस समझौते के ब्योरे सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि-
- इस ट्रेड डील में किसानों के हितों से समझौता किया गया है
- कृषि और डेयरी सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है
- सरकार जानबूझकर शर्तों को सार्वजनिक नहीं कर रही
वहीं, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत का फोकस
ट्रेड डील के अलावा जयशंकर ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर भी अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) का कुछ गिने-चुने देशों में अत्यधिक संकेंद्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा करता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित पहले क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि-
- आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना जरूरी है
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोखिम कम किया जा सकता है
- भारत इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है
‘FORGE पहल’ को भारत का समर्थन
जयशंकर ने महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी ‘FORGE’ पहल के प्रति भारत के समर्थन की भी घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत और लचीला बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने अपने संबोधन में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन समेत भारत सरकार (India US trade deal statement) की पहलों का जिक्र किया, जिनका उद्देश्य रणनीतिक संसाधनों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
वैश्विक कूटनीति में भी सक्रिय भारत
सम्मेलन से पहले जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से द्विपक्षीय बातचीत की। इनमें शामिल हैं-
- कनाडा (अनीता आनंद)
- सिंगापुर (विवियन बालकृष्णन)
- नीदरलैंड्स
- इटली
- मलेशिया
- इजराइल
- पोलैंड, रोमानिया, उज्बेकिस्तान समेत अन्य देश
इन बैठकों को भारत की बहुपक्षीय कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
ट्रेड डील से आगे की तस्वीर
भारत-अमेरिका ट्रेड डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसे रणनीतिक साझेदारी, तकनीक और सप्लाई चेन सहयोग, वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन के बड़े संदर्भ में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें वाणिज्य मंत्रालय और सरकार (India US trade deal statement) की अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।
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