Earbuds को मोबाइल फोन या टैबलेट से कनेक्ट करके मधुर संगीत और फिल्मों का अनुभव कुछ अलग ही होता है। बेहतर ध्वनि गुणवत्ता और किसी भी प्रकार के व्यवधान से मुक्त होने के कारण, यह लोगों की पसंद बन गया है।
आधुनिक तकनीक से जुड़कर, हर आयु वर्ग के लोग इसका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। सुबह की सैर से लेकर रात को सोने तक, लोग इसका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जो रात में कानों में ईयरबड्स लगाकर सोते हैं और उनमें संगीत बजता रहता है। ऐसी आदत कानों के लिए खतरनाक है और ईयरबड्स के लगातार प्रयोग से सुनने की क्षमता काफी कम हो सकती है।
ईयरबड्स से निकलने वाली ध्वनि बहुत तेज़ होती है। जो कान की आंतरिक संरचना में बने मार्गों को प्रभावित करती है। इससे कान की रोम कोशिकाओं और तंत्रिकाओं पर असर पड़ता है। ऐसे में लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ईयरबड्स के इस्तेमाल से बचें या बहुत ज़रूरी होने पर सीमित समय के लिए ही इनका इस्तेमाल करें।
हल्द्वानी क्षेत्र का मामला (Earbuds)
कुछ समय पहले हल्द्वानी क्षेत्र से एक मामला अस्पताल में आया था। जिसमें बच्चा पूरी रात कानों में Earbuds लगाकर सोता रहा और उसमें संगीत बजता रहा।

जब बच्चा सुबह उठा तो उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। उसके माता-पिता उसे अस्पताल ले आए। जाँच में पता चला कि बच्चे कान खराब हो चूका है। उसकी सुनने की शक्ति अभी तक वापस नहीं आई है। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जिनमें बच्चों और युवाओं की सुनने की शक्ति कम हो गई है।
कान बजने की समस्या, फंगस भी हो सकता है
Earbuds का ज़्यादा इस्तेमाल करने से टिनिटस हो सकता है। इसमें अकेले होने पर भी कान में कुछ आवाज़ें सुनाई देने का भ्रम होता है। साथ ही, कान में हवा भी नहीं जा पाती, ऐसे में फंगस भी हो सकता है। जिससे खुजली की समस्या हो सकती है।

इन बातों का ध्यान रखें
- अपने कानों में कभी भी दूसरों के ईयरबड्स का इस्तेमाल न करें
- खासकर सोने से पहले ईयरबड्स का इस्तेमाल करने से बचें
- इन्हें केवल तभी इस्तेमाल करें जब बहुत ज़रूरी हो, लेकिन आवाज़ कम रखें
- माता-पिता को बच्चों को ईयरबड्स इस्तेमाल करने से रोकना चाहिए
- गाड़ी चलाते या चलते समय इनका इस्तेमाल कभी न करें
- मोबाइल फ़ोन को कान से थोड़ी दूरी पर रखें

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